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ग़ज़ल:- जो पढ़ाते पाठ थे की सादगी क्या चीज है । भूख न

ग़ज़ल:-
जो पढ़ाते पाठ थे की सादगी क्या चीज है ।
भूख ने उनको सिखाया बेबसी क्या चीज है ।।१

कौन समझाये बताओ मूर्ख इस इंसान को ।
खा गये हैं जानवर तो आदमी क्या चीज है ।२

हौसलों ने पाल रख़्खा हो जिसे इस दौर में ।
पूछियेगा फिर न उससे कीमती क्या चीज है ।।३

गर्दिशो से उठ के ऊपर फैसले जिसने लिए ।
ज़िन्दगी उनको सिखाती लाज़मी क्या चीज है ।।४

ठोकरें खाकर सँभलता जो यहाँ इंसान अब ।
जानता वो ही यहाँ पर ज़िन्दगी क्या चीज है ।।५

लूटकर घर भर लिए हैं देख लो खादिम यहाँ ।
अब नहीं तुम कह सकोगे की कमी क्या चीज है ।।६

प्यार गर दिल से प्रखर तो भूल जा ये दर्द भी ।
यार जो हँसकर मिलें तो ये नमी क्या चीज है ।।७

२०/०३/२०२४       -    महेन्द्र सिंह प्रखर

©MAHENDRA SINGH PRAKHAR ग़ज़ल:-
जो पढ़ाते पाठ थे की सादगी क्या चीज है ।
भूख ने उनको सिखाया बेबसी क्या चीज है ।।१

कौन समझाये बताओ मूर्ख इस इंसान को ।
खा गये हैं जानवर तो आदमी क्या चीज है ।२

हौसलों ने पाल रख़्खा हो जिसे इस दौर में ।
ग़ज़ल:-
जो पढ़ाते पाठ थे की सादगी क्या चीज है ।
भूख ने उनको सिखाया बेबसी क्या चीज है ।।१

कौन समझाये बताओ मूर्ख इस इंसान को ।
खा गये हैं जानवर तो आदमी क्या चीज है ।२

हौसलों ने पाल रख़्खा हो जिसे इस दौर में ।
पूछियेगा फिर न उससे कीमती क्या चीज है ।।३

गर्दिशो से उठ के ऊपर फैसले जिसने लिए ।
ज़िन्दगी उनको सिखाती लाज़मी क्या चीज है ।।४

ठोकरें खाकर सँभलता जो यहाँ इंसान अब ।
जानता वो ही यहाँ पर ज़िन्दगी क्या चीज है ।।५

लूटकर घर भर लिए हैं देख लो खादिम यहाँ ।
अब नहीं तुम कह सकोगे की कमी क्या चीज है ।।६

प्यार गर दिल से प्रखर तो भूल जा ये दर्द भी ।
यार जो हँसकर मिलें तो ये नमी क्या चीज है ।।७

२०/०३/२०२४       -    महेन्द्र सिंह प्रखर

©MAHENDRA SINGH PRAKHAR ग़ज़ल:-
जो पढ़ाते पाठ थे की सादगी क्या चीज है ।
भूख ने उनको सिखाया बेबसी क्या चीज है ।।१

कौन समझाये बताओ मूर्ख इस इंसान को ।
खा गये हैं जानवर तो आदमी क्या चीज है ।२

हौसलों ने पाल रख़्खा हो जिसे इस दौर में ।

ग़ज़ल:- जो पढ़ाते पाठ थे की सादगी क्या चीज है । भूख ने उनको सिखाया बेबसी क्या चीज है ।।१ कौन समझाये बताओ मूर्ख इस इंसान को । खा गये हैं जानवर तो आदमी क्या चीज है ।२ हौसलों ने पाल रख़्खा हो जिसे इस दौर में । #शायरी