Nojoto: Largest Storytelling Platform

विरह वेदना से द्रवित मन लिए, भटक रही हूँ मृग मरीचि

विरह वेदना से द्रवित मन लिए,
भटक रही हूँ मृग मरीचिका सी,
इन  अधरों   की   प्यास   बुझाने , 
एक रोज तो तुम आओगे,
आशाओं  के दीप आज भी ,
मन की देहरी पर जला कर रखती हूँ,
उस दीप के बुझने से पहले ,
तुम मुझ अपूर्ण को पूर्ण कर जाओगे,
बेला और कुमुदिनी तो रोज खिलती हैं,
पर रातरानी देह जलाती हैं,
मेरे मुरझाए वदन को देखकर , 
चाँदनी भी बुझी बुझी नज़र आती है,
तुम चले आओ इस बार ,
तो हृदय की पीर को थोड़ा आराम आये,
रात भी मानो काटने को दौड़ती है ,
अब दिखते ही नही मुझे अपने साये,
मैं इंतज़ार करूँगी ,मेरे अंतिम श्वास तक ,
जानता है मन कि तुम आओगे,
मेरे तो मोक्ष के द्वार तुम्ही हो, 
मुझे मुक्तिपथ पर तुम्ही तो अपने काँधों पर ले जाओगे।।
                                           पूनम आत्रेय

©poonam atrey
  #इंतज़ारकीहद 
#विरह_वेदना 
#पूनमकीकलमसे  Reema Mittal  एक अजनबी खामोशी और दस्तक अदनासा- -hardik Mahajan  एक अजनबी खामोशी और दस्तक अदनासा- -hardik Mahajan भारत सोनी _इलेक्ट्रिशियन  Sunita Pathania Rama Goswami Sethi Ji Noor Hindustani Saloni Khanna  वंदना .... Praveen Jain "पल्लव" Mahesh Ramani Sanjay Chausali Payal Das  Ambika Mallik "ARSH"ارشد बादल सिंह 'कलमगार' Mahi Bhardwaj Only Budana  Mili Saha Kamlesh Kandpal Ranjit Kumar परिंदा AbhiJaunpur  Anil Ray ram singh yadav दीप बोधि Banarasi.. Utkr