सब बच्चो का अलग अलग उत्तर था किसी ने कहा की मैं लड़

सब बच्चो का अलग अलग उत्तर था किसी ने कहा की मैं लड़का हूँ किसी ने कहा लड़की, किसी ने मोटा किसीने कला , गौरा और यह प्रश्न अध्यापक वर्ग से भी पूछा गया तो उनका उत्तर भी कुछ ऐसा था | मैं अध्यापक या अध्यापिका और
 जब यह प्रश्न उस बच्चे से पूछा तो उष्ण बताया कि मैं एक विद्याथी हूँ मैंने कहा पर कैसे उसने कहा कि मैं पढ़ने
 आता हूँ |  इसलिए मैंने कहा कि बाकि बच्चे भी तो पढ़ने
 ही आते है क्या वे विद्याथी नहीं है इस पर सब हंसने
 लगे और वह सोचता रहा उसे इसी स्थिति में छोड़कर घर लोट आया वह बालक अगली दो सुबह टहलने नहीं
 आया इस पर मैंने विचार किया मगर कुछ अंदाजा 
नहीं लगा पाया |  मैं उसके घर की तरफ गया तो मैंने 
देखा कि वह एक कोने में बैठा गहन विचारो में खोया
 हुआ था | अगली सुबह वह मुझसे पहले ही वह 
पहुंचा हुआ था जैसे ही मैं वह पहुँचा  उसने अभिवादन
 किया और बोलै हे श्रेठ मैं जान चूका हूँ कि मैं क्या हूँ | 

बताओ उसका उत्तर बड़ा ही विचलित करने वाला था
 उसने खा कि मैं न सूंदर हूँ न मोटा न पतला मै तो
 सिर्फ एक आत्मा हूँ उसके इस उत्तर से मेरा ह्रदय
 स्तब्ध हो गया काश संसार का प्रत्येक प्राणी,
 इस सत्य को जान जाए।
भाग-३

©Vikash Arya
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