मैंने मन की पीड़ा को,शब्दों में पिरोया है। क्यों भा

मैंने मन की पीड़ा को,शब्दों में पिरोया है।
क्यों भाव पढ़े शब्दों के तुमने, क्यों आँखों को भिगोया है।।

©Shubham Bhardwaj
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