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नभ ने ओढ़ ली केसरिया काया, धरा पर पल्लवित ह

नभ  ने  ओढ़ ली  केसरिया  काया,
धरा  पर  पल्लवित  हरे पर्ण  पात,
मानव शुद्ध, धवल चरित्र जो साजे 
गुँजित शतरव,उदित स्वतंत्र प्रभात।
...

कि  त्वरित भया विकास का क्रम
मुदित   भया   हर  मुरझाया  मन,
फुलवारी   बन  खिल  उठे अबोध
गर्वित  भया  भारत  का  हर  जन।

©अबोध_मन//फरीदा
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