Rajendra Prasad Pandey Kavi

Rajendra Prasad Pandey Kavi

POET गम मे रहकर मुस्कुराना अब यहां तुम सीख लो, गैर को अपना बनाना अब यहां तुम सीख लो। चोट आई जख्म गहरे आंसू बहाना छोड़ दो, खुद पे तू कर भरोसा प्रेम करना सीख लो।

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#अंधेरे में रोशनी की उम्मीदें जता रहा हूं उम्मीदों के सहारे ही जीवन बिता रहा हूं

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