Manjeet Sharma 'Meera'

Manjeet Sharma 'Meera' Lives in Chandigarh, Chandigarh, India

I am a center government officer and love to write long stories, short stories, satires, essays, poems, gazals etc

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"ये कौन मेरी रूह को छूकर गुज़र गया। मैं सोचती ही रह गई जाने किधर गया।"

ये कौन मेरी रूह को 
छूकर गुज़र गया। 
मैं सोचती ही रह गई 
जाने किधर गया।

💕💞💕

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# अब मुहब्बत को निभाने के ज़माने आए💕

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"ग़ज़ल मुहब्बत इबादत है जिसकी नज़र में। रहेगा हमेशा रूहानी असर में। ये शानो ये शौकत हैं दुनिया के मेले अकेले ही जाना पड़ेगा सफर में। मिलेगी न काफिर को मंजिल सनम की भटकता रहेगा यूं ही रहगुज़र में। अदावत करोगे तो नफरत मिलेगी मिलेगी मुहब्बत मुहब्बत के घर में। गुनाहों से बचना न करना खताएं पयाम-ए-मुहब्बत ले जाना नगर में। पराजय मिले गर तो हिम्मत न खोना। बजेगा नगाड़ा ज़फ़र की डगर में। तमन्ना जो करना गुलिस्तां की 'मीरा' उगाना न कांटे किसी भी शजर में। मनजीत शर्मा 'मीरा'"

ग़ज़ल  

मुहब्बत इबादत है जिसकी नज़र में। 
रहेगा हमेशा रूहानी असर में। 

ये शानो ये शौकत हैं दुनिया के मेले 
अकेले ही जाना पड़ेगा सफर में।

मिलेगी न काफिर को मंजिल सनम की 
भटकता रहेगा यूं ही रहगुज़र में।

अदावत करोगे तो नफरत मिलेगी 
मिलेगी मुहब्बत मुहब्बत के घर में। 

गुनाहों से बचना न करना खताएं 
पयाम-ए-मुहब्बत ले जाना नगर में।

पराजय मिले गर तो हिम्मत न खोना।
बजेगा नगाड़ा ज़फ़र की डगर में।

तमन्ना जो करना गुलिस्तां की 'मीरा'
उगाना न कांटे किसी भी शजर में। 

मनजीत शर्मा 'मीरा'

मुहब्बत इबादत है 🙏

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"इक आंधी ने छितराया सब कूड़ा करकट आंगन में। इक आंधी सिमटा जाए सब कूड़ा करकट आंगन में।"

इक आंधी ने छितराया सब कूड़ा करकट आंगन में। 
इक आंधी सिमटा जाए सब कूड़ा करकट आंगन में।

उफ्फ ये आंधियां 👩‍🎤

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"#DearZindagi गज़ल 🌷🌹🥀🌻💐🌺🌷🌹🥀 जिसकी सूरत से आशनाई है। गीत है या गज़ल, रुबाई है। बंद आंखों में अक्स है उसका खोल दूं गर वही समाई है। उसकी आंखों में इश्क का काजल ज़ुल्फ़ में रात की रानाई है। सुर्ख होठों पे प्यार की शबनम पंखुड़ी फूल की नहाई है। गीत गाती है यूं मुहब्बत के सुरमयी बांसुरी बजाई है। कौन कहता है इश्क अंधा है वो मेरी आंख की बीनाई है। आसमानों से ऊंचा कद दिल का 'मीरा' शान-ए-सुखन बढ़ाई है। *** मनजीत शर्मा 'मीरा'"

#DearZindagi गज़ल 
🌷🌹🥀🌻💐🌺🌷🌹🥀

जिसकी सूरत से आशनाई है।
गीत है या गज़ल, रुबाई है। 

बंद आंखों में अक्स है उसका
खोल दूं गर वही समाई है। 

उसकी आंखों में इश्क का काजल
ज़ुल्फ़ में रात की रानाई है। 

सुर्ख होठों पे प्यार की शबनम 
पंखुड़ी फूल की नहाई है। 

गीत गाती है यूं मुहब्बत के
सुरमयी बांसुरी बजाई है।

कौन कहता है इश्क अंधा है
वो मेरी आंख की बीनाई है। 

आसमानों से ऊंचा कद दिल का
'मीरा' शान-ए-सुखन बढ़ाई है। 
***

मनजीत शर्मा 'मीरा'

जिसकी सूरत से आशनाई है।😘

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