Aayushi Chirag Bhandari

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निरन्तर बढ़ती गौ हत्या और जानवरों पर अत्याचार को लेकर मानव समाज की दर्पण दिखाती एक रचना

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"बालिका वधु बनु दहेज की भी आग जलु फिर भी द्रोपदी सा मुझे सभा मे लजाएँगे माँ में ना आऊँ दुनिया मे न्याय नही मिलता है ना तेरे कृष्णा भी मुझको बचाने आएंगे में ढाल बन तेरी रक्षा करूँगी दुनिया से तेरे अपनो से तुझे कैसे में बचाऊंगी द्रौपदी सी लाज दहेज की भी आग छोड़ो ये दानव तुझे भ्रूण में ही मार जाएंगे आयुषी भंडारी"

बालिका वधु बनु दहेज की भी आग जलु फिर भी  द्रोपदी सा मुझे सभा मे लजाएँगे
माँ में ना आऊँ दुनिया मे न्याय नही मिलता है ना तेरे कृष्णा भी मुझको बचाने आएंगे
में ढाल बन तेरी रक्षा करूँगी दुनिया से तेरे अपनो से तुझे कैसे में बचाऊंगी
द्रौपदी सी लाज दहेज की भी आग छोड़ो ये दानव  तुझे भ्रूण में ही मार जाएंगे
आयुषी भंडारी

save girl child

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"विरह की पीड़ा जब लगी, सताने,अधरों ने खींची लाली.. रात तले अंधियारा, मुझसे रह रह पूछे.. तू कोन है ? पर मेरे........ शब्द सब मौन है। खिड़की से हवाये, घुटन साथ लाई.. सूरज के जलते, पैर....रात अंधेरे को भटका आई... दबे पांव ,चंदा जो, मेरे आंगन आया... तारों का सरदार , मुझसे रह रह पूछे .. तु कौन है ? पर मेरे......... शब्द सब मौन है। धूप खड़ी, चिलमिला रही, पेड़ छाया को ,तरस रहे सागर भीगा ,ठिठुर रहा धरा शून्य सी ,ताक रही कोयल की टोली, मुंडेर पर बैठे,... मुझसे रह रह पूछे.. तू कौन है ? पर मेरे........... शब्द सब मौन है विरह वेदना ,सुलग रही अग्नि तपिश में , झुलस रही ....... मछलियां जल में डूब रही जल भवँर में फंसा हुआ परियो की टोली आ, मुझसे रह रह पूछे... तू कौन है ? पर मेरे......... शब्द सब मौन है। (आयुषी भंडारी) (इंदौर मप्र)"

विरह की पीड़ा
जब लगी,
सताने,अधरों
ने खींची लाली..
रात तले अंधियारा,
मुझसे रह रह पूछे..
तू कोन है ?
पर मेरे........
शब्द सब मौन है।
खिड़की से हवाये,
घुटन साथ लाई..
सूरज के जलते,
पैर....रात अंधेरे 
को भटका आई...
दबे पांव ,चंदा जो,
मेरे आंगन आया...
तारों का सरदार ,
मुझसे रह रह पूछे ..
तु कौन है ?
पर मेरे.........
शब्द सब मौन है।
धूप खड़ी, चिलमिला रही, 
पेड़ छाया को ,तरस रहे
सागर भीगा ,ठिठुर रहा
धरा शून्य सी  ,ताक रही
कोयल की टोली,
 मुंडेर पर बैठे,...
मुझसे रह रह पूछे..
तू कौन है ?
पर मेरे...........
शब्द सब मौन है
विरह वेदना ,सुलग रही
अग्नि तपिश में ,
झुलस रही .......
मछलियां  जल में डूब रही
जल भवँर में फंसा  हुआ
परियो की टोली आ,
मुझसे रह रह पूछे...
तू कौन है ?
पर मेरे.........
शब्द सब मौन है।
(आयुषी भंडारी)
(इंदौर मप्र)

विरह की पीड़ा

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"तैरते पत्थरों में भी श्री राम देखे है हमने शबरी के बैरो में राम देखे है कोई जर्रा ना ऐसा ना जहा मेरे प्रभु, हमने हनुमान के सीने में राम देखे है (आयुषी भंडारी)"

तैरते पत्थरों में भी श्री राम  देखे है
हमने  शबरी के बैरो में राम  देखे है
कोई जर्रा ना ऐसा ना जहा मेरे प्रभु,
हमने हनुमान के सीने में राम देखे है
(आयुषी भंडारी)

रामनवमी की शुभकामनाएं

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