Vivek

Vivek Lives in Kalyan, Maharashtra, India

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"आज कुछ लिखने का मन हुआ तो मोबाईल मेरा कागज पेन हुआ कुछ अपने कुछ पराये अल्फाज उतारे ऑनलाईन की हवाओ ने यहाँ वहाँ बिखारे किसी ने सराहा ,नज़रअंदाज भी करे कोई इंटरनेट पे यारो पेशकश की यही 'रीत है नई खुद ही लिखू कभी खुद ही मिटाता हूँ बदलते दौर में दोस्त ऐसे जुटाता हूँ, ©विवेक"

आज कुछ लिखने का मन हुआ
तो मोबाईल मेरा कागज पेन हुआ

कुछ अपने कुछ पराये अल्फाज उतारे
ऑनलाईन की हवाओ ने यहाँ वहाँ बिखारे

किसी ने सराहा ,नज़रअंदाज भी करे कोई
इंटरनेट पे यारो पेशकश की यही 'रीत है नई

खुद ही लिखू कभी खुद ही मिटाता हूँ
बदलते दौर में दोस्त ऐसे जुटाता हूँ,

©विवेक

#InspireThroughWriting

92 Love

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"साहित्यसंगीतकलाविहीन: साक्षात्पशु: पुच्छविषाणहीन:। तृणं न खादन्नपि जीवमानस्तद्भागधेयं परमं पशूनां॥ अर्थात साहित्य संगीत कला आदि क्षेत्र का ज्ञान या उस मे रुचि ना दिखाने वाले इंसान इंसान नही बल्कि पूँछ और सिंग रहित पशू समान होते है I ये तो अन्य पशूओंका धन्यभाग है के वे तृण ( घास ) का सेवन नही करते , वर्ना उस बेचारे पशुओंका का जीना दुश्वार हो जाता"

साहित्यसंगीतकलाविहीन: साक्षात्पशु: पुच्छविषाणहीन:।

तृणं न खादन्नपि जीवमानस्तद्भागधेयं परमं पशूनां॥

अर्थात

साहित्य संगीत कला आदि क्षेत्र का ज्ञान या 
उस मे रुचि ना दिखाने वाले इंसान इंसान नही 
बल्कि पूँछ और सिंग रहित पशू समान होते है I
ये तो अन्य पशूओंका धन्यभाग है के वे तृण   ( घास ) का सेवन नही  करते , वर्ना उस बेचारे पशुओंका का जीना दुश्वार हो जाता

साहित्य / कलाप्रेमी ...

84 Love

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"कौन कहता है मंजील के बिना सफर नही होता हें कौन से मंजिल के खातिर जरा बताओ अपनाही चक्कर काटते सितारे जिंदगी गुजार देते है"

कौन कहता है  मंजील के बिना सफर नही होता हें

कौन से मंजिल के खातिर जरा बताओ

अपनाही चक्कर काटते सितारे जिंदगी गुजार देते है

सफ़र

82 Love

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"रात को कोई जैसे आफताब का दीदार चाहता हो खुद पर्दे में रहकर खुबसुरती की तारिफ चाहते हो नींद से जगकर कोई देखना ख्वाब चाहता हो खामोशी से सवाल कर जुबां से जवाब चाहते हो दिल में कैद करके खुद ही रुखसत चाहते हो बेरुखी अपनाकर हमसे मोहब्बत चाहते हो"

रात को कोई जैसे आफताब का दीदार चाहता हो
खुद पर्दे में रहकर खुबसुरती की तारिफ चाहते हो

नींद से जगकर कोई देखना ख्वाब चाहता हो
खामोशी से सवाल कर जुबां से जवाब चाहते हो

दिल में कैद करके खुद ही  रुखसत चाहते हो
बेरुखी  अपनाकर हमसे मोहब्बत चाहते हो

चाहत ..

82 Love

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"दोस्त कौन होता है जिसके साथ हम सुख दुख शेअर करते है कोई गलती बताते वक्त शरमाते नही कोई पराक्रमकी बात हो तो कब उसे बताते ऐसा मन करता है जिसको धोखा देने का मन नही होता जिसके साथ झुठ बोल नही पाते क्यूं की उसकी जरूरत ही नही होती पाप पुण्यकी बाते करते बक्त मन कचोटता नही सामने गड्डा है ये चेतावनी देता तो है पर न मानने पर खुद ही हमारे साथ जो कुदता है जिसकी खुशी हमे अपनी लगती है और हमारा गम जिसे अपना लगे जो बिनमाँगे मुसीबत में काम आये जो गलती पर हकसे डाँटता है .लेकिन उसी बात पे औरों से हमारे लिए लडता है जो छोटीसी बात पे रुँठता है और बडी गलती नजर अंदाज करता है .. वही सच्चा दोस्त है"

दोस्त कौन होता है

जिसके साथ हम सुख दुख शेअर करते है
कोई गलती बताते वक्त  शरमाते नही
कोई पराक्रमकी बात हो तो 
कब उसे बताते ऐसा मन करता है
जिसको धोखा देने का मन नही होता
जिसके साथ झुठ बोल नही पाते 
क्यूं की उसकी जरूरत ही नही होती
पाप पुण्यकी बाते करते बक्त मन कचोटता नही
सामने गड्डा है ये चेतावनी देता तो है पर
न मानने पर खुद ही हमारे साथ जो कुदता है
जिसकी खुशी हमे अपनी लगती है
और हमारा गम जिसे अपना लगे
जो बिनमाँगे मुसीबत में काम आये
जो गलती पर हकसे डाँटता है .लेकिन
 उसी बात पे औरों से हमारे लिए लडता है
जो छोटीसी बात पे रुँठता है
और बडी गलती नजर अंदाज करता है ..

वही सच्चा दोस्त है

मित्रता दिनकी शुभकामनाएँ ..

82 Love