Sneha Agarwal 'Geet'

Sneha Agarwal 'Geet' Lives in Jhunjhunu, Rajasthan, India

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"जब से आये हो जिंदगी में मेरी तुम, होठों पे मेरे मुस्कुराहट छाई है। जीवन बगिया के तुम्हीं तो हो माली, तुम्हें पाकर दिल की कली कली मुस्काई है।"

जब से आये हो जिंदगी में मेरी तुम,
होठों पे मेरे मुस्कुराहट छाई है।
जीवन बगिया के तुम्हीं तो हो माली,
तुम्हें पाकर दिल की कली कली मुस्काई है।

#स्नेहा_अग्रवाल

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"काँटे बिछे है इश्क की राह पे फूलों की तुम आस मत करना हमदर्द ही होते है बेदर्द यहाँ पे गैरों की तुम बात मत करना"

काँटे बिछे है इश्क की राह पे
फूलों की तुम आस मत करना  
हमदर्द ही होते है बेदर्द यहाँ पे
गैरों की तुम बात मत करना

#स्नेहा_अग्रवाल
#मैं अनबूझ पहेली

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"तेरे इश्क में सहे हमने जाने कितने सितम फिर भी मुस्कुराके सब सहते रहे ए सनम। खता कुछ हमी से हुई होगी जो खफ़ा है वो वरना बेवफ़ा तो नही होता वो मेरा हमदम। जन्म जन्मों का रिश्ता एक पल में गंवाया, न वफा तुम निभा सके, न निभा सके हम। इश्क़ में मजबूरियाँ तोड़ देती है दिल को , दिल टूटने वाले फिर रोज मनाते हैं मातम। न लगाना 'स्नेहा'किसी पे टूटे दिल का इल्जाम, अब मुस्कुरा के लगाना है हर ज़ख्म पे मरहम।"

तेरे इश्क में सहे हमने जाने कितने सितम
फिर भी मुस्कुराके सब सहते रहे ए सनम।

खता कुछ हमी से हुई होगी जो खफ़ा है वो
वरना बेवफ़ा तो नही होता वो मेरा हमदम।

जन्म जन्मों का रिश्ता एक पल में गंवाया,
न वफा तुम निभा सके, न निभा सके हम।

इश्क़ में मजबूरियाँ तोड़ देती है दिल को ,
दिल टूटने वाले फिर रोज मनाते हैं मातम।

न लगाना 'स्नेहा'किसी पे टूटे दिल का इल्जाम,
अब मुस्कुरा के लगाना है हर ज़ख्म पे मरहम।

#स्नेहा_अग्रवाल
#मैं अनबूझ पहेली

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"खुली किताब सी है जिन्दगी, कोई राज़ मत समझना, इश्क़ में मिले हर नायाब तोहफे को ताज़ मत समझना। लब चुप- चुप से हैं, आँखें भी भीगी -भीगी सी हैं सनम, खोई हुई हूँ ख़्वाबों की दुनियाँ में नाराज़ मत समझना। लेटी हुई हूँ तेरी यादों की चादर से लिपटकर मैं इस तरह, तुम खूबसूरत मकबरे में सोई हुई मुमताज़ मत समझना। जो रूठ जाऊँ महोब्बत में तो आकर के मना लेना तुम, रूठने की अदा को तुम बेवफाई का अंदाज़ मत समझना। हूँ दूर तुमसे हो करके मजबूर कितनी ये तुम नहीं समझते, 'स्नेहा' की दूरीयों को तुम बेवफाई का आग़ाज़ मत समझना।"

खुली किताब सी है जिन्दगी, कोई राज़ मत समझना,
इश्क़ में मिले हर नायाब तोहफे को ताज़ मत समझना।

लब चुप- चुप से हैं, आँखें भी भीगी -भीगी सी हैं सनम,
खोई हुई हूँ ख़्वाबों की दुनियाँ में नाराज़ मत समझना।

लेटी हुई हूँ तेरी यादों की चादर से लिपटकर मैं इस तरह,
तुम खूबसूरत मकबरे में सोई हुई मुमताज़ मत समझना।

जो रूठ जाऊँ महोब्बत में तो आकर के मना लेना तुम,
रूठने की अदा को तुम बेवफाई का अंदाज़ मत समझना।

हूँ दूर तुमसे हो करके मजबूर कितनी ये तुम नहीं समझते,  
 'स्नेहा' की दूरीयों को तुम बेवफाई का आग़ाज़ मत समझना।

#स्नेहा_अग्रवाल

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"लबों पे है हँसी और दिल में छुपाती हूँ गम कई, रोज का किस्सा है ये तो नहीं है कोई बात नई। आदत सी हो गई है तेरी रुसवाइयों की सनम, तेरी हर गलत बात भी लगने लगी है मुझे सही। नेह के डोरी कच्ची थी फिर भी न तोड़ पाई, रिश्तों के बोझ तले इस कदर मैं दबती गई। न प्यार था न ही थे जज़्बात कोई हमारे बीच, फिर भी लबों पे लिए मुस्कुराहट मैं जीती रही। तूफान दर्द का दिल में उठा और उठे सवाल भी, पर 'स्नेहा' ने दिल की बात नहीं किसी से न कहीं।"

लबों पे है हँसी और दिल में छुपाती हूँ गम कई,
रोज का किस्सा है ये तो नहीं है कोई बात नई।

आदत सी हो गई है तेरी रुसवाइयों की सनम,
तेरी हर गलत बात भी लगने लगी है मुझे सही।

नेह के डोरी कच्ची थी फिर भी न तोड़ पाई,
रिश्तों के बोझ तले इस कदर मैं दबती गई।

न प्यार था न ही थे जज़्बात कोई हमारे बीच,
फिर भी लबों पे लिए मुस्कुराहट मैं जीती रही।

तूफान दर्द का दिल में उठा और उठे सवाल भी,
पर 'स्नेहा' ने दिल की बात नहीं किसी से न कहीं।

#स्नेहा_अग्रवाल
#मैं_अनबूझ_पहेली

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