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deveshdixit4847
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Devesh Dixit

मुझे कविताएँ लिखना, पढ़ना, सुनना एवम सुनाना अत्यधिक पसंद है। 7982437710

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Devesh Dixit

भूल (दोहे)

भूल हुई जो मान लो, पर हो छोटी जान।
माफी भी तुमको मिले, और नहीं अपमान।।

अपराधी में नाम हो, करो न ऐसी भूल।
माफी उसकी है नहीं, लगते खुद को शूल।।

भूल करो जो तुम वही, खाओगे फटकार।
माफी फिर मिलती नहीं, सजा मिले हर बार।।

बार बार अपराध कर, रटे भूल का नाम।
मिले नहीं सम्मान है, रहता दुखी तमाम।।

साधारण सी भूल पर, तुम जो करो विचार।
फिर पनपेगा वो नहीं, होगा भी उद्धार।।
...........................................................
देवेश दीक्षित

©Devesh Dixit
  #भूल #दोहे #nojotohindi #nojotohindipoetry 

भूल (दोहे)

भूल हुई जो मान लो, पर हो छोटी जान।
माफी भी तुमको मिले, और नहीं अपमान।।

अपराधी में नाम हो, करो न ऐसी भूल।

#भूल #दोहे #nojotohindi #nojotohindipoetry भूल (दोहे) भूल हुई जो मान लो, पर हो छोटी जान। माफी भी तुमको मिले, और नहीं अपमान।। अपराधी में नाम हो, करो न ऐसी भूल। #Poetry #sandiprohila

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Devesh Dixit

जीने लगें हैं अब

सारे गमों को पीछे छोड़,
देखो जीने लगे हैं अब।
लोगों की फ़िक्रों को छोड़,
देखो बढ़ने लगे हैं अब।

नज़रअंदाज़ किया उनको,
जिसने भी कांँटे बोए हैं।
क्या कहें अब हम उनको,
वे खुद ही कर्मों पर रोए हैं।

उन्हें उनके हाल पर छोड़,
सपने बुनने लगे हैं अब।
उन सपनों को अपने जोड़,
देखो जीने लगे हैं अब।

क्यों करनी है उनकी चिंता,
उनसे क्या सरोकार है अब।
नकाब के पीछे है जो चेहरा,
उन पर कहाँ एतबार है अब।

आशाओं को जो हटाया,
देखो जीने लगे हैं अब।
स्वयं को फिर सुदृढ़ पाया,
और संवरने लगे हैं अब।
.....................................
देवेश दीक्षित
स्वरचित एवं मौलिक

©Devesh Dixit
  #जीन_लगें_हैं_अब #nojotohindi #nojotohindipoetry 

जीने लगें हैं अब

सारे गमों को पीछे छोड़,
देखो जीने लगे हैं अब।
लोगों की फ़िक्रों को छोड़,
देखो बढ़ने लगे हैं अब।

#जीन_लगें_हैं_अब #nojotohindi #nojotohindipoetry जीने लगें हैं अब सारे गमों को पीछे छोड़, देखो जीने लगे हैं अब। लोगों की फ़िक्रों को छोड़, देखो बढ़ने लगे हैं अब। #Poetry

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Devesh Dixit

White आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे

आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे।
मंजिल के रास्ते भी तो कच्चे न थे।।

डगमगा रहे मेरे ये कदम बस यूँ ही।
राह में मिले राहगीर तो सच्चे न थे।।

भटकाया ऐसा मुझे मंजिल से मेरे।
कहीं मेरे फैसले भी तो कच्चे न थे।।

खैर फिर मुड़ चला मंजिल की ओर।
अब देखा कि वो रास्ते तो अच्छे न थे।।

कँटीली झाड़ियाँ बिखरी थीं जहाँ तहाँ।
जाँच कर देखा वो कांँटे तो कच्चे न थे।।

जब संभल कर रखा भी पैर इधर उधर।
तब जाना मेरे जूते भी तो अच्छे न थे।।

चटक चटक कर उखड़ रहे थे जहाँ तहाँ।
मैं हैरान था मेरे जूते भी तो सस्ते न थे।।

कहीं मिला मोची तो ठीक कराए मैंने।
फिर उसने कहा ये जूते तो कच्चे न थे।।

क्यों टूट गए ये जूते यूँ जगह जगह से।
अब लगा आपके ये रास्ते तो अच्छे न थे।।

किसी तरह पाया फिर मंजिल को मैंने।
जबकि आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे।।
.........................................................
देवेश दीक्षित

©Devesh Dixit
  #आँधियों_के_इरादे_तो_अच्छे_न_थे #nojotohindi #nojotohindipoetry 

आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे

आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे।
मंजिल के रास्ते भी तो कच्चे न थे।।

डगमगा रहे मेरे ये कदम बस यूँ ही।

#आँधियों_के_इरादे_तो_अच्छे_न_थे #nojotohindi #nojotohindipoetry आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे। मंजिल के रास्ते भी तो कच्चे न थे।। डगमगा रहे मेरे ये कदम बस यूँ ही। #Poetry #sandiprohila

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Devesh Dixit

उलझा है मन खुद में

उलझा है मन खुद में मेरा, 
कैसे अपनी मैं बात कहूँ।
हे शिव जी अब तो कृपा करो, 
तुमसे ही अब मैं आस करूँ।

दुनिया में है ये विष कितना,
बिन पिये मुरझा हम तो रहे।
बाजू में छूरी हैं रखते,
मुख से श्री राम पुकार रहे।

अपराधों की है भीड़ लगी,
ले खंजर अब वे भोंक रहे।
चैनो अमन है कैसे कहें,
वे तो विपदा में झोंक रहे।

अब कैसे हो विश्वास यहांँ,
संशय में जीवन डोल रहा।
जो टूट गये विश्वास यहाँ,
रिश्तों में है जंग बोल रहा।

मानवता को है चोट लगी, 
शैतानी जज़्बे जाग उठे।
संस्कारों की भी बली चढ़ी,
अब देख तमाशा भाग उठे।

उलझा है मन खुद में मेरा, 
कैसे अपनी मैं बात कहूँ।
हे शिव जी अब तो कृपा करो, 
तुमसे ही अब मैं आस करूँ।
.......................................
देवेश दीक्षित

©Devesh Dixit
  #उलझा_है_मन_खुद_में #nojotohindi #nojotohindipoetry 

उलझा है मन खुद में

उलझा है मन खुद में मेरा, 
कैसे अपनी मैं बात कहूँ।
हे शिव जी अब तो कृपा करो, 
तुमसे ही अब मैं आस करूँ।

#उलझा_है_मन_खुद_में #nojotohindi #nojotohindipoetry उलझा है मन खुद में उलझा है मन खुद में मेरा, कैसे अपनी मैं बात कहूँ। हे शिव जी अब तो कृपा करो, तुमसे ही अब मैं आस करूँ। #Poetry #sandiprohila

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Devesh Dixit

अक्षर अक्षर हमें सिखा कर

अक्षर अक्षर हमें सिखा कर,
देते अद्भुत ज्ञान हैं।
उस ज्ञान से परिपक्व हो कर,
मिला हमें सम्मान है।
पहली गुरु ही माँ है होती,
कहें सभी विद्वान हैं।
दूजे में फिर गुरु हैं आते,
जो दिलाते मान हैं।
भक्ति भाव से इनको पूजें,
इनमें ही भगवान हैं।

जीवन का ये सच बताते,
जो उसका आधार है।
बच्चों से ये प्यार जताते,
उनका ये अधिकार है।
खेल खेल में पाठ पढ़ाते,
गुरु जी का आभार है।
शिक्षा का ये महत्व बताते,
इनका ये उपकार है।
माँ बाप भी यही समझाते,
इनका भी ये प्यार है।

बच्चे कभी राह न भटकें,
उनका ये अरमान है।
नाम कमाएंँ वो भी अपना,
जिससे हो सम्मान है।
उनका मान बढे फिर इतना,
जिसका उन्हें गुमान है।
मात पिता और गुरु हैं अपने,
ये भी तो वरदान हैं।
जो भी शिक्षा दे दे हमको,
वो ही गुरु समान है।
.........................................
देवेश दीक्षित

©Devesh Dixit
  #guru_purnima #अक्षर_अक्षर_हमें_सिखा_कर #nojotohindi #nojotohindipoetry 

अक्षर अक्षर हमें सिखा कर

अक्षर अक्षर हमें सिखा कर,
देते अद्भुत ज्ञान हैं।
उस ज्ञान से परिपक्व हो कर,
मिला हमें सम्मान है।

#guru_purnima #अक्षर_अक्षर_हमें_सिखा_कर #nojotohindi #nojotohindipoetry अक्षर अक्षर हमें सिखा कर अक्षर अक्षर हमें सिखा कर, देते अद्भुत ज्ञान हैं। उस ज्ञान से परिपक्व हो कर, मिला हमें सम्मान है। #Poetry

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Devesh Dixit

अटल सत्य (दोहे)

अटल सत्य है मौत ही, सबको ये संज्ञान।
फिर भी क्यों समझे नहीं, करते हैं अभिमान।।

मोह छूटता है नहीं, अद्भुत ये संसार।
अटल सत्य ये जान कर, भरते भी भण्डार।।

अनदेखा इसको करें, पछताते फिर बाद।
अटल सत्य को भूल कर, दिखलाते आबाद।।

ईश्वर की ही देन है, ये जो माया जाल।
अटल सत्य है जान लो, मौत यही विकराल।।

घबराते इससे बहुत, आज सभी इंसान।
अटल सत्य है क्या कहें, कहते सभी सुजान।।
...............................................................
देवेश दीक्षित

©Devesh Dixit
  #अटल_सत्य #दोहे #nojotohindi #nojotohindipoetry 

अटल सत्य (दोहे)

अटल सत्य है मौत ही, सबको ये संज्ञान।
फिर भी क्यों समझे नहीं, करते हैं अभिमान।।

मोह छूटता है नहीं, अद्भुत ये संसार।

#अटल_सत्य #दोहे #nojotohindi #nojotohindipoetry अटल सत्य (दोहे) अटल सत्य है मौत ही, सबको ये संज्ञान। फिर भी क्यों समझे नहीं, करते हैं अभिमान।। मोह छूटता है नहीं, अद्भुत ये संसार। #Poetry #sandiprohila

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Devesh Dixit

इश्क और अश्क़

इश्क और अश्क़ का तो,
चोली दामन का साथ है।
कहती है ये दुनिया सारी,
इसमें कामदेव का हाथ है।

इश्क है कुछ क्षण का पर,
नेत्रों में अश्क़ बहुत गहरे हैं।
कितने भी जुल्म सहलो पर,
सुनने को यहाँ सब बहरे हैं।

ये आकर्षण का ही जलवा है,
जिसने इश्क को जन्म दिया।
जातिवाद के इस भेदभाव ने,
अश्कों को ही तब सार दिया।

बुरे भाव को यूँ  लेकर बैठे,
इश्क का है जो नाम दिया।
छत्तीस टुकड़े ही कर डाले,
उसे अश्क़ का जाम दिया।

समझो इश्क बदनाम हुआ,
क्यों अश्कों को भरे हुए हो।
लक्ष्य को अपने छोड़ दिया,
क्यों जीवन से रुष्ठ हुए हो।

इश्क और अश्क़ का तो,
चोली दामन का साथ है।
खत्म हुआ भरोसा देखो,
ऊपर न किसी का हाथ है।
....................................
देवेश दीक्षित

©Devesh Dixit
  #इश्क_और_अश्क़ #nojotohindi #nojotohindipoetry 

इश्क और अश्क़

इश्क और अश्क़ का तो,
चोली दामन का साथ है।
कहती है ये दुनिया सारी,
इसमें कामदेव का हाथ है।

#इश्क_और_अश्क़ #nojotohindi #nojotohindipoetry इश्क और अश्क़ इश्क और अश्क़ का तो, चोली दामन का साथ है। कहती है ये दुनिया सारी, इसमें कामदेव का हाथ है। #Poetry #sandiprohila

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Devesh Dixit

जीने लगें हैं अब

सारे गमों को पीछे छोड़,
देखो जीने लगे हैं अब।
लोगों की फ़िक्रों को छोड़,
देखो बढ़ने लगे हैं अब।

नज़रअंदाज़ किया उनको,
जिसने भी कांँटे बोए हैं।
क्या कहें अब हम उनको,
वे खुद ही कर्मों पर रोए हैं।

उन्हें उनके हाल पर छोड़,
सपने बुनने लगे हैं अब।
उन सपनों को अपने जोड़,
देखो जीने लगे हैं अब।

क्यों करनी है उनकी चिंता,
उनसे क्या सरोकार है अब।
नकाब के पीछे है जो चेहरा,
उन पर कहाँ एतबार है अब।

आशाओं को जो हटाया,
देखो जीने लगे हैं अब।
स्वयं को फिर सुदृढ़ पाया,
और संवरने लगे हैं अब।
.....................................
देवेश दीक्षित

©Devesh Dixit
  #जीने_लगें_हैं_अब #nojotohindi #nojotohindipoetry 

जीने लगें हैं अब

सारे गमों को पीछे छोड़,
देखो जीने लगे हैं अब।
लोगों की फ़िक्रों को छोड़,
देखो बढ़ने लगे हैं अब।

#जीने_लगें_हैं_अब #nojotohindi #nojotohindipoetry जीने लगें हैं अब सारे गमों को पीछे छोड़, देखो जीने लगे हैं अब। लोगों की फ़िक्रों को छोड़, देखो बढ़ने लगे हैं अब। #Poetry #sandiprohila

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Devesh Dixit

वीराने से रास्ते

देख हुआ भयभीत था,
वो वीराने से रास्ते।
एक परिंदा तक नहीं था,
मेरी हिम्मत के वास्ते।

चौराहे पर मैं खड़ा था,
कहीं जाने के वास्ते।
थम चुके थे पैर भी मेरे,
देख ये वीराने रास्ते।

किससे पूछूँ पता मंजिल का,
कौन मुझको बताएगा।
डरा सहमा सा मैं खड़ा था,
कौन हिम्मत दे जाएगा।

बाकी तरफ भी दूर-दूर तक,
सिर्फ थे वीराने से रास्ते।
हिम्मत कर मैं बढ़ चला था,
अपने मंजिल के वास्ते।

कौन सी डगर को बढ़ चला मैं,
सब थे अनजाने से रास्ते।
पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण,
सभी थे वीराने से रास्ते।

चलते-चलते तभी रुका मैं,
जब मंजिल थी मेरे सामने।
वीरानों को छोड़ आया मैं,
जो लगे थे मुझको थामने।
.....................................
देवेश दीक्षित

©Devesh Dixit
  #वीराने_से_रास्ते #nojotohindi #nojotohindipoetry 

वीराने से रास्ते

देख हुआ भयभीत था,
वो वीराने से रास्ते।
एक परिंदा तक नहीं था,
मेरी हिम्मत के वास्ते।

#वीराने_से_रास्ते #nojotohindi #nojotohindipoetry वीराने से रास्ते देख हुआ भयभीत था, वो वीराने से रास्ते। एक परिंदा तक नहीं था, मेरी हिम्मत के वास्ते। #Poetry #sandiprohila

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Devesh Dixit

मेरा अनुभव (दोहे)

मेरा अनुभव कह रहा, बनों नहीं अनजान।
जीवन यह संकट भरा, मत होना हैरान।।

मेरा अनुभव कह रहा, ऐसा दो पैगाम।
खुशियों की भरमार हो, मुख पर तेरा नाम।।

मेरा अनुभव कह रहा, क्यों करते तुम बैर।
संकट भी फिर घेरता, मने नहीं तब खैर।।

मेरा अनुभव कह रहा, है कैसा यह दौर।
मानवता को छोड़ते, करे नहीं अब गौर।।

मेरा अनुभव कह रहा, सच की छोड़ें डोर।
ऐसे ही गर यह चला, कैसे होगी भोर।।

मेरा अनुभव कह रहा, हो सबका सम्मान।
मन तेरा यह खुश रहे, दूजे का भी जान।।
.......................................................
देवेश दीक्षित

©Devesh Dixit
  #मेरा_अनुभव #दोहे #nojotohindipoetry #nojotohindi 

मेरा अनुभव (दोहे)

मेरा अनुभव कह रहा, बनों नहीं अनजान।
जीवन यह संकट भरा, मत होना हैरान।।

मेरा अनुभव कह रहा, ऐसा दो पैगाम।

#मेरा_अनुभव #दोहे #nojotohindipoetry #nojotohindi मेरा अनुभव (दोहे) मेरा अनुभव कह रहा, बनों नहीं अनजान। जीवन यह संकट भरा, मत होना हैरान।। मेरा अनुभव कह रहा, ऐसा दो पैगाम। #Poetry #nikita #sandiprohila

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