Devesh Dixit

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I like poem read and write very much 7982437710

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"असमाजिक तत्व जब आते हैं समाज में मचाते हैं हुड़दंग डराते हैं बेकार में अपनी धाक जमाने को आतंक ये मचाते हैं गुनाह पर गुनाह कर कानून को अंगूठा ये दिखाते हैं पकड़ सको तो पकड़ लो अभियान ये चलाते हैं देखो विवश कानून भी इनको पकड़ नहीं पाते हैं गुनाहों की सीमा नहीं ये विश्व रिकॉर्ड बनाते हैं चोरी, हत्याएँ और बलात्कार ही अपना ध्ये बनाते हैं निशाचर हैं ये निशाचर ही ऐसा रूप दिखाते हैं कुछ वश में नहीं होता इनकी अंत निकट जब आता है पुलिस तब एक्शन में है आती और एंकाउंटर इनका कर दिया जाता है खत्म होती फिर कहानी इनकी समाज राहत की सांस तब लेता है .................................................................."

असमाजिक तत्व 
जब आते हैं समाज में 
मचाते हैं हुड़दंग 
डराते हैं बेकार में 
अपनी धाक जमाने को
आतंक ये मचाते हैं 
गुनाह पर गुनाह कर कानून को 
अंगूठा ये दिखाते हैं 
पकड़ सको तो पकड़ लो 
अभियान ये चलाते हैं 
देखो विवश कानून भी
इनको पकड़ नहीं पाते हैं 
गुनाहों की सीमा नहीं 
ये विश्व रिकॉर्ड बनाते हैं 
चोरी, हत्याएँ और बलात्कार ही 
अपना ध्ये बनाते हैं 
निशाचर हैं ये निशाचर ही 
ऐसा रूप दिखाते हैं 
कुछ वश में नहीं होता इनकी 
अंत निकट जब आता है 
पुलिस तब एक्शन में है आती 
और एंकाउंटर इनका कर दिया जाता है 
खत्म होती फिर कहानी इनकी 
समाज राहत की सांस तब लेता है 
..................................................................

#असमाजिकतत्व

# Pawan Rajput @123 Anshu writer Shalini choudhary homquotes roy kasyap # Adv.Raj Kaushik🙏( AD.Grk)🙏 Pankaj Singh sunny Adlakha khushvinder dahiya Khushboo Gola khubsurat 0000 murli dhar King sajid khan 𝙆𝙪𝙡𝙙𝙚𝙚𝙥 𝙘𝙝𝙖𝙩𝙪𝙧𝙫𝙚𝙙𝙞 (गुमनाम आशिक 😡♔) Akram Raja Khan

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"मुरझाया नोट"

मुरझाया नोट

#मुरझायानोट

@ Pankaj Singh Pawan Rajput @123 Anshula Thakur Anshu writer miss unknown # @Sameul Pandey

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"आप सब को पढ़ कर और सुन कर मेरी प्रेरणा जागती है की कुछ लिखूं मैं भी कागज पर ये तमन्ना जागती है फिर खो जाता हूं अक्षरों के महासागर में और डूब जाता हूं शब्दों के विचारधारा में कौन से शब्द चुनू और कौन से छोड़ूं इसी असमंजस में फंस जाता हूं फिर चुनता हूं शब्द-पुष्पों को उसी को बुनने में लग जाता हूं जोड़ता हूं शब्दों से शब्दों को नई रचनात्मक माला को जन्म देता हूं पहुंचाता हूं आप सब के बीच इसको यही विचार करता हूं पसंद आए आप सब को यही आशा करता हूं …………………………………. ©Devesh Dixit"

आप सब को पढ़ कर और सुन कर
मेरी प्रेरणा जागती है
की कुछ लिखूं मैं भी कागज पर
ये तमन्ना जागती है
फिर खो जाता हूं
अक्षरों के महासागर में
और डूब जाता हूं
शब्दों के विचारधारा में
कौन से शब्द चुनू और कौन से छोड़ूं
इसी असमंजस में फंस जाता हूं
फिर चुनता हूं शब्द-पुष्पों को
उसी को बुनने में लग जाता हूं
जोड़ता हूं शब्दों से शब्दों को
नई रचनात्मक माला को जन्म देता हूं
पहुंचाता हूं आप सब के बीच इसको
यही विचार करता हूं
पसंद आए आप सब को
 यही आशा करता हूं
………………………………….

©Devesh Dixit

#प्रेरणा

# Sunny Soni sunny Adlakha Anshula Thakur Anshu writer Pawan Rajput @123 # Drsantosh Tripathi Nishu Gusain Shalini choudhary murli dhar सौरभ (लखनवी) # Kisan Kisan channel Y. A. R. O. Tashan # Pankaj Singh सुुमन कवयित्री Sandhya Sharda Rajput Meghna kapoor # @Sameul Pandey @Abhishek Negi @Khushi Sankhla @chandra-the unique @Samitaroy

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"पिताजी हैं बीमार सेहत पर हुआ वार हर मिनट में बुलाते रहते है पूछने पर कुछ बता नहीं पाते हैं कानों पर हुआ इस तरह कुछ आघात नहीं भी बुलाते पर लगता दे रहे आवाज़ उन्हें सुनने के लिए जाएं तो मना कर दें बिना हिचकाए मैंने नहीं बुलाया है यही सुनने मैं आया है एक बार नहीं दो बार नहीं कई बार हुआ है हर बार हुआ है लगता है जहन में बसने लगे है कान मेरे बजने लगे हैं इस स्थिति का मुझे हुआ कुछ ऐसा आभास है जैसे मेरी सोच में लगा अल्पविराम है क्या लिखूं क्या न लिखूं ये सोच कर बेहाल है जब भी कुछ सोचने लगता हूं आती उनकी आवाज़ है अंदर से झुंझला जाता हूं जब पड़ता बार बार व्यवधान है पूछने जाता हूं की क्या हुआ तब मिलता नहीं कुछ आदेश है फिर कुछ सोचने लगता हूं कलम को तैयार करने लगता हूं फिर लगता है आवाज़ देने लगे है कान मेरे बजने लगे हैं ....................."

पिताजी हैं बीमार 
सेहत पर हुआ वार
हर मिनट में बुलाते रहते है
पूछने पर कुछ बता नहीं पाते हैं
कानों पर हुआ इस तरह कुछ आघात
नहीं भी बुलाते पर लगता दे रहे आवाज़
उन्हें सुनने के लिए जाएं
तो मना कर दें बिना हिचकाए
मैंने नहीं बुलाया है 
यही सुनने मैं आया है
एक बार नहीं
दो बार नहीं
कई बार हुआ है
हर बार हुआ है
लगता है जहन में बसने लगे है
कान मेरे बजने लगे हैं

इस स्थिति का मुझे
हुआ कुछ ऐसा आभास है
जैसे मेरी सोच में
लगा अल्पविराम है
क्या लिखूं क्या न लिखूं
ये सोच कर बेहाल है
जब भी कुछ सोचने लगता हूं
आती उनकी आवाज़ है
अंदर से झुंझला जाता हूं 
जब पड़ता बार बार व्यवधान है
पूछने जाता हूं की क्या हुआ
तब मिलता नहीं कुछ आदेश है
फिर कुछ सोचने लगता हूं
कलम को तैयार करने लगता हूं
फिर लगता है आवाज़ देने लगे है
कान मेरे बजने लगे हैं
.....................

#कानमेरेबजनेलगेहैं

# Pankaj Singh Anshika Gangwar Anshu writer Adv.Raj Kaushik🙏( AD.Grk)🙏 Adv. Rakesh kumar soni # Pawan Rajput @123 murli dhar King sajid khan Raftaar Kisan Kisan channel Y. A. R. O. Tashan pari gulnaz

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"महंगाई छाई इस कदर की जीना दूभर हो गया एक – एक रोटी की तड़प से इंसान बेसुध हो गया सिर झुकाये इस कदर मेहनत में लीन हो गया पैसे कमाने कि लगन में इंसान बोझिल हो गया घर की झड़प में इंसान धीरज खो रहा धूप कि तड़प में खुद बेहाल हो रहा महंगाई से जूझता इंसान अब खुद पे जुल्म ढा रहा जिंदगी से गद्दारी कर मौत को गले लगा रहा अत्याचार और लूट का तांडव इंसान कर रहा एक के बाद एक गुनाह कर होंसला बुलंद कर रहा मौत को लगाया गले से जीवन से पल्ला झाड़ लिया गुनाह कर फिर खुद से जीवन का दर्पण देख लिया वाह री महंगाई वाह रे गुनाह कैसी तुमने अँधेरी दिखायी कलयुग का है ये वाकई नजारा ऐसी तुमने रीत चलायी महंगाई से जूझते इंसान ने ऐसी मार खाई की भूख की गजब तड़प ने जहान्नुम की याद दिलायी"

महंगाई छाई इस कदर
की जीना दूभर हो गया
एक – एक रोटी की तड़प
से इंसान बेसुध हो गया
सिर झुकाये इस कदर
मेहनत में लीन हो गया
पैसे कमाने कि लगन
में इंसान बोझिल हो गया
घर की झड़प में
इंसान धीरज खो रहा
धूप कि तड़प में
खुद बेहाल हो रहा
महंगाई से जूझता इंसान
अब खुद पे जुल्म ढा रहा
जिंदगी से गद्दारी कर
मौत को गले लगा रहा
अत्याचार और लूट का
तांडव इंसान कर रहा
एक के बाद एक गुनाह कर
होंसला बुलंद कर रहा
मौत को लगाया गले से
जीवन से पल्ला झाड़ लिया
गुनाह कर फिर खुद से
जीवन का दर्पण देख लिया
वाह री महंगाई वाह रे गुनाह
कैसी तुमने अँधेरी दिखायी
कलयुग का है ये वाकई नजारा
ऐसी तुमने रीत चलायी
महंगाई से जूझते इंसान ने
ऐसी मार खाई की
भूख की गजब तड़प ने
जहान्नुम की याद दिलायी

#महंगाईसेजूझताइंसान

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@Drsantosh Tripathi @Pawan Rajput @123 @Anshu writer @Adv. Rakesh kumar soni @CH Air😘🙏

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