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Stories related to भगोड़ा आर्थिक अपराधी

Praveen Jain "पल्लव"

#love_shayari अपराधी से दिखता सरकारों के चेहरे है

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White पल्लव की डायरी
फिक्र चिंता में युवा उलझे
दंश बेरोजगारी का झेले है
निगल गयी सियासतें भविष्य उनका
आत्मबल उत्साह जीवन का तोड़े है
प्रतियोगिता को ना मिलता नैतिकबल
माफिया ने पैमाने सब तोड़े है
शह मात के खेल में जीवन उजड़ते
दिखते सत्ताओ के काले चेहरे है
दम तोड़ता भविष्य भारत का
अंधेरे में घर घर के युवाजन है
हर चौखट पर मातम पसरा है
अपराधी सा दिखता सरकारों के चेहरे है
                                                    प्रवीण जैन पल्लव

©Praveen Jain "पल्लव" #love_shayari अपराधी से दिखता सरकारों के चेहरे है

TARUN KUMAR VIMAL

#Thinking बीमा मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: * जीवन बीमा: यह बीमा पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर उनके परिवार या लाभार्थियों को आर्थिक स

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White बीमा मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
 * जीवन बीमा: यह बीमा पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर उनके परिवार या लाभार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है। जीवन बीमा कई प्रकार के होते हैं, जैसे कि टर्म लाइफ इंश्योरेंस, होल लाइफ इंश्योरेंस, एंडोमेंट प्लान, आदि।
 * सामान्य बीमा: यह बीमा जीवन के अलावा अन्य चीजों के लिए होता है, जैसे कि स्वास्थ्य, घर, गाड़ी, आदि। सामान्य बीमा भी कई प्रकार के होते हैं, जैसे कि स्वास्थ्य बीमा, गृह बीमा, वाहन बीमा, आदि।

©TARUN KUMAR VIMAL #Thinking बीमा मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
 * जीवन बीमा: यह बीमा पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर उनके परिवार या लाभार्थियों को आर्थिक स

Anuradha T Gautam 6280

काम का #बहाना करके धोखा देने वाला -धोखेबाज जिम्मेदारी से भागने वाला उसे भगोड़ा घोषित कर देना जिंदा होते हुए भी मरे के समान रिश्ते हो उसे म

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नवनीत ठाकुर

#षड्यंत्रों की छाया हर दिल पर भारी, भ्रष्टाचार की चादर ने लूट ली जिम्मेदारी। शोषण के जख्म चीखते हैं बेआवाज़, जुर्म के मंजर बन गए रोज़ का आगा

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White षड्यंत्रों की छाया हर दिल पर भारी,
भ्रष्टाचार की चादर ने लूट ली जिम्मेदारी।
शोषण के जख्म चीखते हैं बेआवाज़,
जुर्म के मंजर बन गए रोज़ का आगाज़।

अपहरण के धंधे अब आम हो गए,
अपराधी खुलेआम इनाम हो गए।
छेड़छाड़ के ज़ख्म लहू-लुहान हैं,
इंसाफ के मंदिर खुद बदगुमान हैं।

यह कैसी सभ्यता, यह कैसी रवायत?
जहां जुर्म को मिलती है हर इक सहायत।

©नवनीत ठाकुर #षड्यंत्रों की छाया हर दिल पर भारी,
भ्रष्टाचार की चादर ने लूट ली जिम्मेदारी।
शोषण के जख्म चीखते हैं बेआवाज़,
जुर्म के मंजर बन गए रोज़ का आगा
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