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RjSunitkumar
promise day quotes in Hindi केवल फरवरी के सात दिन नही अस्तित्व के साथ सात जनम तक तुमसे जुड़े रहेंगे ओर तुम्हारे थे तुम्हारे ही बन के रहेंगे ये वादा हे आपसे। ©RjSunitkumar दिल से
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relationship quotes अब फरवरी के कुछ ऐसे दिन आएंगे की मोहब्बत के नाम पर कपड़े उतरेंगे। ©RjSunitkumar दिल से
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जब से उनसे नजरों से नजर मिली तब से किसी ओर से नजर मिलाने की जरूर ही न रही। ©RjSunitkumar दिल से
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read moreThe Insecure Being
White भीख की तरह देते हैं वो समय हमको इससे अच्छा तो समय न ही दो, बताते हैं वो "व्यस्त" खुदको, इतनी सस्ती गोली तो यार न ही दो हम क्या हैं वो हमें है मालूम, तुम तो हमें हमारा परिचय न ही दो और हां, रहो मशग़ूल अपने ही शामियानों में तुम हमेशा, अब जो बचा है, उसे दोस्ती का नाम तो न ही दो! @theinsecurebeing ©The Insecure Being व्यस्त #sad😔पोएट्री
व्यस्त sad😔पोएट्री
read morePrakash Vidyarthi
a-person-standing-on-a-beach-at-sunset " सरस्वती वंदना" :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: विद्यादायिनी, ज्ञान विषारद हम दिन बालक तुझको उच्चारत। ऋषि मुनि सभी तुझको उच्चारत। तेरे पुंजू चरण दर पे। हे मां सरस्वती, रख हाथ मेरे सरपे। हे मां शारदे, मेरा जीवन सफ़ल करदे।। शास्त्रों और विज्ञानों में, तू हैं वेद पुराणों में। महाभारत रामायण में भी, बसी हैं सबकी जुबानों में।। रूप तुम्हीं हो गुरुवर के हे मां सरस्वती......२ तू ही जननी श्रृष्टि हैं, ज्ञान बुद्धि प्रकृति हैं। पशु पक्षी सभी जीव चराचर, की तू मईया दृष्टि हैं।। दानव मानव सभी रंक राजा की, तू मईया दृष्टि हैं।। तेरे दर्शन को तरसे। हे मां सरस्वती........२ भाव भरी भवभूति मां, श्रद्धा प्रेम की भूखी मां। सुषमा सुकून मांगे रौशनी, करे बंदगी प्रार्थना।। विद्यार्थी को ज्ञान भर दें। मांगू आशीष प्रकाश वरदे हे मां सरस्वती...… स्वरचित:- प्रकाश विद्यार्थी भोजपुर बिहार ©Prakash Vidyarthi #SunSet #पोएट्री #गीत #song #thought_of_the_day
#SunSet #पोएट्री #गीत song #thought_of_the_day
read morePrakash Vidyarthi
Unsplash "मैने शादी करली" :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: बातों ही बातों में मैने आज शादी करली। सात फेरो के रस्मो को पूरा आजादी करली।। प्राकृतिक वातावरण में सज धज। खुला अम्बर सूर्य किरण जग मग।। मानो विवाह मंडप बना हो पर्वत। हरे भरे चौकोर पेड़ पौधें हरसत।। जल जीवन को सह साक्षी मानकर। सूर्य देव पक्षीयो को ईश्वर जानकर।। चले कदम से कदम मिलाकर। आगे पाक्षे पग चले डुलाकर।। ख़ुद से ही वैदिक मंत्रोच्चारण किए। रिवाजों के नियम को पालन किए।। वसन पट सूत का वरमाला बनाएं। मंगलसूत्र समझ कन्या को पहनाए।। हर्षित पुलकित दुल्हन बलखाए। देख विधि मन मंद मंद मुस्काए।। मिट्टी का लाल भाव सिन्दूर सुहाए। लाए माथ सुहागन बन ठन इठलाए।। धाय अन्ततः शुभ आशीष शरण को। कुर्सी स्नेहिल एक दूजे के छुए चरण को।। पति पत्नी अब बने सुन्दर जोड़ी। एक शिवा तो दूजा गौरा गुणी गोरी।। हुईं रात्रि विश्राम धाय दोनों धामा। बेला मिलन की आई सुहागरात रामा।। एकदम अनाड़ी दूल्हा दुल्हन बुद्धि विवेकी। ऑनलाइन हुआ प्रेम प्रदर्शन मिलन मुंह सेकी।। स्वरचित -: प्रकाश विद्यार्थी भोजपुर बिहार ©Prakash Vidyarthi #lovelife #पोएट्री
Lalit Saxena
बढ़ गई है आजकल औकात हमारी थाने में कल हुई है दरयाफ़्त हमारी मुंसिफ़ को है मालूम पेशेवर गवाह है शायद करेगा वो ही शनाख़्त हमारी इस झूठ के शहर से परेशान हैं बहुत सच की रही है आदत हज़रात हमारी आदमी होना है अगर जुर्म तो कुबूल और क्या होनी है तहक़ीक़ात हमारी बस्ती है ये प्यार की,आबोहवा बेहतर पूछी न जाए मज़हब ओ जात हमारी एक रोज़ तो सुनें, दिल की ख्वाहिशें एक बार तो पढ़िए दरख़्वास्त हमारी ©Lalit Saxena शायरी दिल से
शायरी दिल से
read moreLalit Saxena
Unsplash मै लिखता हूं.....इसमें तारीफ़ नहीं तारीफ़ तो मेरे बेवफ़ा हालातों की है जो मुझे लिखने के लिए हर पल, हर लम्हा बेताब करते है।।।।। गर ये लम्हे ये हालात ये अफसाने ना होते ..............तो क्या मैं लिखता? कोई कवि, शायर, गजलकार, या फनकार कलम कही पड़ी होती किसी कोने में और कागज़ हवा में उड़ रहे होते कैसा लगता....ख्वाबों में गोते लगाना डूब कर अंधेरों में कही दफ़न हो गए होते। मै लिखता हूं.....इसमें तारीफ़ नहीं!!! ©Lalit Saxena #Book दिल से
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read moreGurudeen Verma
White शीर्षक- आदमी मैं नहीं वैसा --------------------------------------------------------------------- आदमी मैं नहीं वैसा, जैसा कि तुम मानते हो। हकीकत क्या है मेरी, तुम नहीं जानते हो।। आदमी मैं नहीं वैसा------------------------।। मुझको पसंद नहीं है झूठ, ना झूठ मैं बोलता हूँ। सच को तुम सुनना नहीं चाहते, इसलिए चुप रहता हूँ।। जब भी बोला मैं सच तो, मुझे सच की सजा मिली। इसीलिए हूँ मैं अकेला, यह नहीं जानते हो।। आदमी मैं नहीं वैसा---------------------।। मुझको भी चाहिए खुशी, देखता हूँ ख्वाब ऐसे। मांगें मुझसे सभी खुशियां, इतने हो पास मेरे पैसे।। मतलब मुझको भी चाहिए, शान और शौहरत। मकसद मेरा यह तुम, शायद बुरा मानते हो।। आदमी मैं नहीं वैसा----------------------।। एक तरफा मोहब्बत क्या, जायज नहीं कहलाती है। प्यार करना गुनाह है क्या, दुनिया किससे चलती है।। लेकिन उससे मेरा प्यार, सच्चा और पवित्र है। नहीं हूँ बेवफा मैं, क्यों सच नहीं मानते हो।। आदमी मैं नहीं वैसा--------------------।। शिक्षक एवं साहित्यकार गुरुदीन वर्मा ऊर्फ़ जी. आज़ाद तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान) ©Gurudeen Verma #पोएट्री लव शायरी लव स्टोरी
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read morePrakash Vidyarthi
White "प्रथा स्वयंवर होता" ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: काश फिर से कोई प्रथा स्वयंवर होता। नीचे स्वतंत्र धरती ऊपर खुला अम्बर होता।। मिलता सबको आमंत्रण सब धुरंधर होता। न कल छपत किसी के अन्दर होता।। भेदता कोई जन मानव मछली की आँखें सही आंसर होता। बन जाते सारथी कान्हा जीवन में न भूमि कोई बंजर होता।। प्रेमी अपनी प्रतिष्ठा में जाता सात समन्दर होता। प्रेम की परीक्षा में जो जीता वहीं सिकन्दर होता।। कोई भी राम सीता लखन कोई बजरंगी बन्दर होता। जाती धर्म के बन्धन से परे मुहब्बत का मंतर होता।। न कोई बड़ा न कोई छोटा न कोई छुछुंदर होता। समानता का सामान अवसर प्राप्त पुरंदर होता।। तोड़ देता कोई भी धनुष शिव भक्ती का तंतर होता। सह लेता कोई भी कष्ट चाहें पथ में कांटे कंकड़ होता।। त्याग देती गर सुख नारी लोभ लालच न किसी के अन्दर होता। स्वर्ग से सुन्दर लगता भारत न श्रृंगार जलन जालंधर होता।। मिलता सबको बराबर मौका शुभ मुहूर्त का जंतर होता। करता प्रयास हर विद्यार्थी गर न कोई भेदभाव अन्तर होता।। जीत लेता प्रकाश कलयुगी सीता को न कोई आडंबर होता। गूंजता जय माता दी हर दिशा में खुश ब्रह्मा विष्णु शंकर होता।। स्वरचित -प्रकाश विद्यार्थी। भोजपुर आरा बिहार ©Prakash Vidyarthi #Sad_Status #पोएट्री #कविता_शिव_की_कलम_से
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