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*अनामिका*
मन के बहकावे में ना आ, मन राह भुलाए भ्रम में डाले। तू इस मन का दास ना बन, इस मन को अपना दास बना ले।। ©*अनामिका* #मन
SAAHIL KUMAR
White यादें बहुत है बस याद करने का मन नहीं करता, कुछ यादों को भूलने का वक्त नहीं मिलता दरवाजे जो कभी दिल की चाहतों के थे अब उन दरवाजों को खोलने का मन नहीं करता की रहे कुछ दरवाजे बंद तो ही बेहतर है लम्हों में भी गुजर जाने दो बीती बातों को अब उनके लिए खुद को चुप रहने देना अच्छा नहीं लगता ©SAAHIL KUMAR मन
मन
read moreRajnish Shrivastava
प्रकृति की इन वादियों में मन बहकने सा लगता है आंखो में इन नजारों को कैद करने को दिल तरसता है इच्छा तो होती है कि यही कहीं चुपचाप रह लिया जाए लेकिन फिर वतन की याद में दिल तड़पने लगता है । ©Rajnish Shrivastava #मन
shobhani
White "मन क्या कहता है" चलो सुनती हूं की कहता है यह मन उडुं उन पक्षियों की तरह खुले आसमान में जिसे ना गिरने का डर ना कोई रोकने वाला,, उस मोर सा मन जो खुलकर बारिश में नाचना चाहे, उस कोयल सा मन जिसकी आवाज सूफियानी गानों सा लगे,, उस नदी सामन जो कल कल बहना चाहे,, उस दर्पण सा मन जो खुद को देख शर्माए,, बस इतना ही तो चाहे मन ।। ©Shobhani singh #मन#
#मन#
read morePooja Udeshi
White इंसान का शरीर किराए का मकान है आत्मा बन हम इस मे रह रहे है एक दिन इस मकान को छोड़ना है और दूसरा शरीर यानि मकान ढूढना है तो जब तक है इस मकान रूपी शरीर मे है,इसको साफ सुथरा रखे, बीमारी गन्दगी और बुरी आदतों को good buy कहे, भगवान को मस्का लगाऐ कि next मकान शरीर अच्छा वाला देना next birth मे....... ©Pooja Udeshi #GoodNight #शरीर
Parasram Arora
White प्रेम के सघन कुंज मे उदासी की गहरी छाँव. तले आओ. पल दो पल बैठे और इस संतप्त मन को थोड़ा सा बाँट लें ©Parasram Arora संतप्त मन
संतप्त मन
read moreNilam Agarwalla
Unsplash मन तो पापी मतवाला है, नहीं किसी की सुनता है। क्षणभर के सुख की खातिर जो,गलत राह पर चलता है। समझाए से नहीं समझता, पछताता फिर जीवन भर आंसू बहते रहते दृग से, पल-पल आहें भरता है।। स्वरचित -निलम अग्रवाला, खड़गपुर ©Nilam Agarwalla #“मन”
#“मन”
read moreAvinash Jha
White मन है, चाहता है आसमानों को छूना, सितारों की राहों में खुद को ढूँढ़ना। जंगलों की खामोशी में छिपा, एक गीत सुनना, या नदी की लहरों संग बह जाना। मन है, जो सपनों की कश्ती में बैठ, दूर कहीं चला जाता है। कभी बूँदों की चुप्पी समझता है, कभी आँधियों से सवाल करता है। मन है, जो छोटे-छोटे सुखों में खुशियों का संसार बुनता है। कभी अकेलेपन में साथी बनता, तो कभी भीड़ में खुद को खोता है। मन है, जो बंद दरवाज़ों को खोलता है, आस की किरणें समेटता है। हर धड़कन में एक कहानी रचता, हर ख्वाब में जीवन रचता। मन, न थमता है, न रुकता है। यह तो बस उड़ान भरता है, आसमानों से परे अपनी ही दुनिया बसाता है। ©Avinash Jha #मन
puja udeshi
बदन मे फूल खिलते है कब तक जवा हो शरीर तब तक.......... बाद मे तो फूल की जगह धूल मिलती है वो भी हवा मे उड़ जाती है..... ©puja udeshi #शरीर #pujaudeshi