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seema patidar
तुझे पाने के लिए तुझसे ही शिकायते करते है तेरे लिए हम तूझसे ही लड़ते है तुम घुले भी तो मुझमें इस तरह से हो तेरे होकर भी हम हर पल तुझे ही ढूंढते है ©seema patidar तेरे होकर भी तुझे ही ढूंढते है ....
तेरे होकर भी तुझे ही ढूंढते है ....
read morekuldeepbabra
White क्या कहूं मैं तुमको अपने बारे में मैं कोई खुदा नहीं जिसे ढूंढ रहे हो तुम जमाने में मैं तुम्हारे दिल में हूं तुम किसी और दिल में दिल में हो जिसे ढूंढ रहे हो तुम तन्हाई मे ©kuldeepbabra जो हमारे दिल में हम उसको ढूंढते हैं किसी और के# दोस्त शायरी
जो हमारे दिल में हम उसको ढूंढते हैं किसी और के# दोस्त शायरी
read moreSanjeev0834
शर्त लगी थी ख़ुशी को ऐक अल्फ़ाज़ मैं लिखने की लोग किताब ढूंढते रह गए हमने "दोस्त" लिख दिया...! There was a bet to write happiness in one word People kept searching for the book We wrote "friend"...! ©Sanjeev0834 #शर्त लगी थी #ख़ुशी को ऐक #अल्फ़ाज़ मैं #लिखने की लोग #किताब ढूंढते रह गए हमने "#दोस्त" लिख दिया...! #beingsanjeev0834🦅 #nawab_saab💗🤞 #2
Internet Jockey
White हम कितना कुछ ढूंढते हैं पर पहचानते नहीं ©Internet Jockey #good_night हम कितना कुछ ढूंढते हैं पर पहचानते नहीं
#good_night हम कितना कुछ ढूंढते हैं पर पहचानते नहीं
read moretheABHAYSINGH_BIPIN
White तराशो मुझे ख्वाहिशों के सांचे में, तपने दो इस बदन की जलती आग में। बरसों मुझ पर बादल-सा बरसा करो, बह जाने दो मुझे दरिया की धार में। घटा बनके छाई तेरी ज़ुल्फ़ें घनी, खो जाने दो मुझे मखमली छांव में। ऐशगाह अब वीरान क्यों लगता है, ले चलो मुझे ख़्वाबों की गोद में। अरसों से खुद को सँवारा है मैंने, बांध लो अब मुझे नैनों के जाल में। लौट गए जज़्बातों के सारे खरीदार, मैं बिक गया बस इश्क़ के बाज़ार में। थक चुका हूं मैं इस कच्ची सर्दी से, ले चलो मुझे इश्क़ की गरमाहट में। ढूंढते रहे जो मुझे शहर के शोर में, अब बसा हूं 'अभय' कुदरत के गांव में। ©theABHAYSINGH_BIPIN #sad_shayari तराशो मुझे ख्वाहिशों के सांचे में, तपने दो इस बदन की जलती आग में। बरसों मुझ पर बादल-सा बरसा करो, बह जाने दो मुझे दरिया की धार
#sad_shayari तराशो मुझे ख्वाहिशों के सांचे में, तपने दो इस बदन की जलती आग में। बरसों मुझ पर बादल-सा बरसा करो, बह जाने दो मुझे दरिया की धार
read moreनवनीत ठाकुर
कभी खो जाने का डर था, फिर भी ढूंढते रहे, जब रौशनी मिली, तो फिर अंधेरों की सजा क्या है। हम नहीं चाहते थे कोई इनाम या शोर, पर जब खुद को समझ लिया, तो फिर ताल्लुुक़ में क्या है। ज़िंदगी के मोड़ों पे, ग़म और खुशी की छाँव मिली, मगर जब हकीकत सामने आई, तो फिर ख्वाबों में क्या है। तोड़ने चले थे हर तारा, अपने आसमान से, मगर जब खुदा मिला, तो फिर इस तलाश में क्या है। ©नवनीत ठाकुर #नवनीतठाकुर कभी खो जाने का डर था, फिर भी ढूंढते रहे, जब रौशनी मिली, तो फिर अंधेरों की सजा क्या है। हम नहीं चाहते थे कोई इनाम या शोर, पर जब
#नवनीतठाकुर कभी खो जाने का डर था, फिर भी ढूंढते रहे, जब रौशनी मिली, तो फिर अंधेरों की सजा क्या है। हम नहीं चाहते थे कोई इनाम या शोर, पर जब
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