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Rajnish Shrivastava
हे पार्थ तुम मुझे कहां ले जा रहे हो । पूछने पर भी कुछ बता नहीं रहे हो मैं वक्त के मिजाज को समझ न सका तुम मुझसे सच क्यों छुपा रहे हो । ©Rajnish Shrivastava #पार्थ
Parth kapadiya
तुम्हें चाहता हूं अब उसका कोई हिसाब नहीं है प्यार इस कदर है की अब अल्फाज नहीं है समझ जाओ तो बात है पूरी सच्ची! और ना समझो तो अब कोई मलाल नहीं है ©Parth kapadiya #UskeHaath #पार्थ #Love #ishq #parthkapadiya #poeticinsan #Pyar #Trending #aashiqui #aashiqui2 Krish Sankhariya pramodini mohapatra Adhura Shayar cute girl Anshu writer
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read moreअरुण चौबे ‘प्रखर’
कर्म से अपने हमें चरितार्थ भी होना पड़ेगा, बुद्ध होने के लिए सिद्धार्थ भी होना पड़ेगा। मारने वाले से होता श्रेष्ठ जिसने हो बचाया, ज्ञान यह अनमोल हमने था युवा से एक पाया, उस युवा के ज्ञान का निहितार्थ भी होना पड़ेगा; बुद्ध होने के लिए सिद्धार्थ भी होना पड़ेगा। सारथी बन कर रथी का मार्गदर्शन जब किया था, कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में जो ज्ञान गीता का दिया था, ज्ञान वह पाना है यदि तो पार्थ भी होना पड़ेगा; बुद्ध होने के लिए सिद्धार्थ भी होना पड़ेगा। ©अरुण चौबे ‘प्रखर’ #बुद्ध #सिद्धार्थ #पार्थ
Sunita Bishnolia
उठा पार्थ गांडीव लक्ष्य तेरे जीवन का क्या है, आओ याद दिलाऊँ। अपनी राहें भूल गया तू, तुझको राह दिखाऊँ। तरकश में ना तीर समाये,अब तक छूट न पाए । तीरों पर मैं पार्थ तेरी ,नाम विजय लिख जाऊँ l मद के मारे देखो कोई, झूल रहा है झूला। शोक छोड़ चल उन राहों पर, उठा पार्थ गाण्डीव तू तज,मन से घोर निराशा। ढूँढ मध्य तेरी सेना में, छिपा तो नहीं बगुला। चुप्पी मत तू साध कि घर में, सेंध लगी है भारी, भूल समय जो बीत गया है, आगे काम जरूरी। जीत-हार पहलू सिक्के के, मत घबराना इनसे, राह तेरी न कोई रोके, कैसी भी मजबूरी। ✍️सुनीता बिश्नोलिया ©® #उठा पार्थ गाण्डीव #nojoto #hindi
Pankaj Priyam
उठा लो गांडीव हे पार्थ ********************* सच है की युद्ध कोई पर्याय नहीं, पर बिन इसके अब उपाय नहीं। संकट में जब पड़ा हो अपना देश, कहां शोभती तब दया शांति वेश। हो रहा हरपल मानवता का संहार संयम साहस को कर रहा ललकार। नहीं पाप कोई, है अब पूण्य यही आतंक के खिलाफ उठाना हथियार। देख अपनो को खड़ा कुरुक्षेत्र में अर्जुन ने जब युद्ध से किया इनकार कृष्ण ने तब भरी हुँकार उठा लो गांडीव हे पार्थ! कर डालो दुष्टों का संहार परिस्थितियां फिर है वही हो रहे धमाके, बंदूके बरस रही दहशत में जिन्दगी बसर रही उजड़ गयी है माँग कितनी गोदें कितनी हो गयी सूनी। शांति की राह में मिला है धोखा इन पथरायी आंखों मे आंसू नही खून का है कतरा सूखा बूढ़ी नजरों को है बेटे का इंतजार खड़ी है बहनें लिए राखी का प्यार इन अबलाओं के आँचल है खाली मेंहदी से पहले उजड़ी सुहाग की लाली किसी आतंकी उग्रवादी को नहीं क्षमा अधिकार समय कह रहा है फिर से बारम्बार अमन चैन की खातिर उठा लो गांडीव हे पार्थ। कर डालो दुष्टों का संहार। ©पंकज भूषण पाठक "प्रियम "
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