Shah~writes

Shah~writes Lives in Delhi, Delhi, India

गीता भी मुझे मुंह जुबानी याद है उसे भी याद है हर्फ हर्फ क़ुरआन का मैं जानता हूं मर के जलने का हुनर वो भी जानता है कलमा कब्रिस्तान का

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"आंखों से भी लिखी जाती हैं कुछ दास्तानें हर कहानी को कलम की जरूरत नहीं होती"

आंखों से भी लिखी जाती हैं कुछ दास्तानें


हर कहानी को कलम की जरूरत नहीं होती

#अल्फ़ाज़

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"#DearZindagi भीगी नहीं थी मेरी आँखें कभी वक़्त के मार से देख तेरी थोड़ी सी बेरुखी ने इन्हें जी भर के रुला दिया"

#DearZindagi भीगी नहीं थी मेरी आँखें कभी वक़्त के मार से

देख तेरी थोड़ी सी बेरुखी ने इन्हें जी भर के रुला दिया

#आंसू

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"उससे कुछ भी भुलाया नहीं जाता सब याद रहता है लगता है मोहब्बत करने वाला इसीलिए बर्बाद रहता है"

उससे कुछ भी भुलाया नहीं जाता सब याद रहता है

लगता है मोहब्बत करने वाला इसीलिए बर्बाद रहता है

#तेरी_यादें

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"आंसूओ को कह दो कोई और निगाह ढूंढ ले हम तो अंगारों पे भी अब मुस्कुरा के चलते है"

आंसूओ को कह दो कोई और निगाह ढूंढ ले

हम तो अंगारों पे भी अब मुस्कुरा के चलते है

#अश्क़

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"#DearZindagi मसला ये नहीं कि दर्द कितना है मुद्दा तो ये है कि परवाह किसको है"

#DearZindagi मसला  ये  नहीं  कि  दर्द  कितना  है

मुद्दा  तो  ये  है  कि  परवाह  किसको  है

#मोहब्बत #परवाह Shah~writes

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