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Naushad bin Sharif
Unsplash 1. "दिखावे के शरीफ बनने की आदत नहीं है हमारी" मीनिंग: हमें दिखावे के लिए अच्छा बनने की जरूरत नहीं है, हम सच्चे और ईमानदार हैं। 2. "शब्द चाहे जैसे भी हो खुलेआम लिखते हैं" मीनिंग: हम अपने विचारों को खुलकर और स्पष्ट रूप से व्यक्त करते हैं, चाहे हमारे शब्द कितने भी कठोर या सच्चे क्यों न हों। ©Naushad bin Sharif #Booसाथ: 1. "दिखावे के शरीफ बनने की आदत नहीं है हमारी" मीनिंग: हमें दिखावे के लिए अच्छा बनने की जरूरत नहीं है, हम सच्चे और ईमानदार हैं। 2
#Booसाथ: 1. "दिखावे के शरीफ बनने की आदत नहीं है हमारी" मीनिंग: हमें दिखावे के लिए अच्छा बनने की जरूरत नहीं है, हम सच्चे और ईमानदार हैं। 2
read moreNaushad bin Sharif
हम एक छोटी सी चिंगारी हो सकते हैं, लेकिन हम एक बड़ी आग को जला सकते हैं। हम एक छोटी सी आवाज हो सकते हैं, लेकिन हम एक बड़े बदलाव को ला सकते हैं।" हम वो नहीं जो दुनिया बदल देगी लेकिन हा। हम वो जरूर है जो दुनिया को सोचने पर मुजबूर कर देगे। अर्थ: हम अकेले दुनिया को बदलने की क्षमता नहीं रखते हैं, लेकिन हम अपने विचारों और कार्यों से दुनिया को सोचने पर मजबूर कर सकते हैं। - नौशाद बिन शरीफ ©Naushad bin Sharif #Likho हम एक छोटी सी चिंगारी हो सकते हैं, लेकिन हम एक बड़ी आग को जला सकते हैं। हम एक छोटी सी आवाज हो सकते हैं, लेकिन हम एक बड़े बदलाव को ला
#Likho हम एक छोटी सी चिंगारी हो सकते हैं, लेकिन हम एक बड़ी आग को जला सकते हैं। हम एक छोटी सी आवाज हो सकते हैं, लेकिन हम एक बड़े बदलाव को ला
read moredilkibaatwithamit
हमारे बीच नफ़रत की कोई दीवार न करते यहीं इक काम तो बस अपने चोकीदार न करते हमारा देश होता चीन से जापान से आगे सियासी लोग जो धर्मों का कारोबार न करते गरीबी बेशसी बे रोजगारी ख़त्म हो जाती धर्म के नाम पे नेता जो भ्रष्टाचार न करते वतन में उन्नती होती मियां हर बार से ज़्यादा वतन का होशला जो पस्त कुछ गद्दार न करते सियासी आदमी कब का इसे बर्बाद कर देतें अगर हम जान से ज़्यादा वतन से प्यार न करते गुलामी में ही रहता देश गर हिन्दू-मुस्लिमा सब कभी अपनी दर्राती को अगर तलवार न करते .... अनवर क़ुरैशी #26January #26January2025 ©dilkibaatwithamit हमारे बीच नफ़रत की कोई दीवार न करते यहीं इक काम तो बस अपने चोकीदार न करते हमारा देश होता चीन से जापान से आगे सियासी लोग जो धर्मों का
हमारे बीच नफ़रत की कोई दीवार न करते यहीं इक काम तो बस अपने चोकीदार न करते हमारा देश होता चीन से जापान से आगे सियासी लोग जो धर्मों का
read moreनवनीत ठाकुर
a-person-standing-on-a-beach-at-sunset खामोशी को इंकार भी कैसे समझूं, अभी तक कुछ कहा भी तो नहीं है। हो न हो इत्तेफाक इससे तुम्हे, सर पर मेरे कोई इल्ज़ाम थोड़ी है। वो कोई और होंगे उंगली से जो दब जाए, मियां हम हम हैं कोई दाल नहीं है। ©नवनीत ठाकुर #नवनीतठाकुर खामोशी को इंकार भी कैसे समझूं, अभी तक कुछ कहा भी तो नहीं है। हो न हो इत्तेफाक इससे तुम्हे, सर पर मेरे कोई इल्ज़ाम थोड़ी है। वो
#नवनीतठाकुर खामोशी को इंकार भी कैसे समझूं, अभी तक कुछ कहा भी तो नहीं है। हो न हो इत्तेफाक इससे तुम्हे, सर पर मेरे कोई इल्ज़ाम थोड़ी है। वो
read moreबेजुबान शायर shivkumar
मतलब कि पूरी दुनिया हैं, मतलबी हर कोई नहीं , शरीफ तो यहाँ आप भी और हम भी नहीं । क्योंकि.... मतलब कि दुनिया में शरीफ गुम हो जाया करते है जनाब , कोई प्यार में मतलबी तो कोई पैसे के लिए मतलबी । ©बेजुबान शायर shivkumar #मतलब कि पूरी #दुनिया हैं, मतलबी हर कोई नहीं , #शरीफ तो यहाँ आप भी और हम भी नहीं । क्योंकि.... मतलब कि दुनिया में शरीफ गुम हो जाया करते
Sudheesh Shukla
a-person-standing-on-a-beach-at-sunset खुद को शरीफ बस इतना रखो, जितना आपके साथ दुनिया रहे ©Sudheesh Shukla #खुद को शरीफ बस इतना रखो, जितना आपके साथ दुनिया रहे
#खुद को शरीफ बस इतना रखो, जितना आपके साथ दुनिया रहे
read moreSunny Kumar
New Year Resolutions शरारत करो, साजिशे नहीं, हम शरीफ है, सीधे नहीं। ©Sunny Kumar #newyearresolutions शरारत करो, साजिशे नहीं, हम शरीफ है, सीधे नहीं। attitude shayari
#newyearresolutions शरारत करो, साजिशे नहीं, हम शरीफ है, सीधे नहीं। attitude shayari
read moretheABHAYSINGH_BIPIN
White टूटी खिड़कियाँ, वो कच्चा मकान, जहां रहता था कभी सच्चा इंसान। मॉडर्न के बेहकावे में हम आकर, कैसे शरीफ दिखाता झूठा इंसान। रीति वो पुरानी कितनी प्यारी थी, जहां हफ्तों रुकता था हर मेहमान। भाईचारे की भावना एक हस्ती थी, अब भाई को नहीं मिलता सम्मान। अब किराए का शहर छोड़कर, उसी गांव में फिर से बस रहा इंसान। खो दिया है सबका अपमान कर, अब गैरों में ढूंढता है सम्मान। ये कैसा दौर चला है कलयुग का, देखकर भी कुछ न सीखता है इंसान। मुकर जाता है एक मदद के नाम से, अभय से ना रखता है जान-पहचान। ©theABHAYSINGH_BIPIN #sad_qoute टूटी खिड़कियाँ, वो कच्चा मकान, जहां रहता था कभी सच्चा इंसान। मॉडर्न के बेहकावे में हम आकर, कैसे शरीफ दिखाता झूठा इंसान। रीति वो
#sad_qoute टूटी खिड़कियाँ, वो कच्चा मकान, जहां रहता था कभी सच्चा इंसान। मॉडर्न के बेहकावे में हम आकर, कैसे शरीफ दिखाता झूठा इंसान। रीति वो
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