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बच्ची

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वो मासूम सी नाजुक बच्ची, एक आँगन की कली थी वो।
माँ बाप की आँख का तारा थी, अरमानो से पली थी वो।।

जिसकी मासूम अदाओ से, माँ बाप का दिन बन जाता था।
जिसकी एक मुस्कान के आगे, पत्थर भी मोम बन जाता था।।

वो छोटी सी बच्ची थी, ढंग से बोल ना पाती थी।
देख के जिसकी मासूमियत, उदासी मुस्कान बन जाती थी।।

जिसने जीवन के केवल, पांच बसंत ही देख़े थे।
उसपे ये अन्याय हुआ, ये कैसे विधि के लिखे थे।।
एक पांच सालकी बच्ची पे, ये कैसा अत्याचार हुआ।
एक बच्ची को बचा सके ना, कैसा मुल्क लाचार हुआ।।

उस बच्ची पे जुल्म हुआ, वो कितनी रोई होगी।
मेरा कलेजा फट जाता है,तो माँ कैसे सोयी होगी।।
 
जिस मासूम को देखके मन में, प्यार उमड़ के आता है।
देख उसी को मन में कुछ के, हैवान उत्तर क्यों आता है।।

कपड़ो के कारण होते रेप, जो कहे उन्हें बतलाऊ मै।
आखिर पांच साल की बच्ची कोा, साड़ी कैसे पहनाऊँ मै।।
गर अब भी हम ना सुधरे तो, एक दिन ऐसा आएगा।
इस देश को बेटी देने मे, भगवान भी जब घबराएगा।।

 

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सुनों...
।। ताउम्र तुम सहज और सरल ही बने रहना...
तालिम भले पा लो तुम जितनी भी....
तुम  तब भी बच्ची थी अब भी बच्ची हो.... 
कभी बड़े ना होना ।।
✍️ब्रजेश कुमार #NojotoQuote

बच्ची हो तुम पहले बड़ी हो जाओ ।
#nojotohindi
#Nojoto
#vyang

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आंनद के जाने के बाद भी दिव्या का प्यार कम नहीं होता हैं , वह हर दिन भगवान से आंनद की कामयाबी और खुशियों की दुआ मांगती । उधर आंनद दिव्या के फैसले को गलत साबित करने के लिए जी जान से परीक्षा की तैयारी में लग जाता है ।आंनद की मेहनत और दिव्या की दुआ रंग लाती है , आई ए एस की परीक्षा पास कर वह अपने पोस्ट पर कार्यरत हो जाता है , धिरे धिरे उसके पास बंगला , गाड़ी , मंहगे कपड़ें सब हो जाता है , और उसके माता पिता उसकी शादी के लिए लड़की ढ़ूंढने लगते है , आंनद की शादी के सिलसिले मे उसके चाचा चाची से बात करने आंनद और उसके माता पिता पुराने घर आते है ।दिव्या के घर के पास से गुजरते समय आंनद के दिमाग में दिव्या को अपनी शान शौकत दिखाने का ख्याल आता है ,वह अपने माता पिता को छोड़ वापस दिव्या के घर आता है , दिव्या दिव्या कहकर चिल्लाने लगता है , जब खिडक़ी नहीं खुलती है , तो जोर से दरवाजा पिटने लगता है , तभी पड़ोस से एक आदमी आता है और बताता है , कि दिव्या की मां की मौत होने के कारण उसके मामा उसे ले गए , पड़ोसी दिव्या की अपाहिज होने की बात भी बताता है , यह जानकार आंनद हैरान हो जाता हैं , वह सोचता है मैं कितना वेबकूफ हूं 3 महिना मे भी मैं यह ना जान सका  जिन आंखों में  मैं डूबा था उसका दर्द ना देख सका , उसके दिल. मे रहने के बाद भी मैं उस का हाल ना समझ सका ।  काश वो अभी मुझे मिल जाए तो मैं अपने गुनाहों की माफी मांग लू वह वहीं बैठ रोने लगता है तभी एक बच्ची पूछती है, आप आंनद भैया हो वह हां मे सर हिलाता है वह बच्ची एक कागज दे चली जाती हैं आंनद कागज खोलकर पढ़ता है आंनद मैंने तुमहारे सिवा किसी से प्यार नहीं किया, तुम मेरा प्यार थे, हो , और रहोगे बस अपने दिल में मेरे लिये नफरत नहीं रखना ,मुझे माफ कर देना मुझे ढ़ूंढने मे समय बरबाद नही करना अगर मेरे लिए सच मे कुछ करना चाहते हो तो जब भी मौका मिले लाचार मजबूर लोगों की मदद करना और सोचना तुमने मेरी मदद कर दी भगवान तुम्हें सारी खुशिया दे ,तुम्हारी दिव्या

अंतिम पन्ना कहानी पार्ट 7 ....दोस्तो इस कहानी का पार्ट 1 से 7 तक.पढ़ें और हमे बता दे कहानी कैसी लगी...हमारे हर पोस्ट को पढ़ने के लिए Bell आई कोन को टच करे । आपकी दोस्त .....मुस्कान राजपूत ☺

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Ram  

ईश्वर......

ईश्वर.....

अंजान की आँखों से लगातार आँसू बहे जा रहे थे.......
एक छोटी बच्ची के चेहरे पर मुस्कान थी......
क्योंकि वह ईश्वर और धर्म का अर्थ समझ चुका था.......
जबकि वह बच्ची काफी दिनों से उदास थी......

अंजान एक 30 बरस का युवक था उसका धर्म करम मे अत्यंत विश्वास था वह रोज नियम से शहर के एक प्राचीन मंदिर मे दर्शन करने जाता था वँहा लंबी लाइन मे लगकर लगभग 20 से 25 मिनट मे उसको भगवान के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता था लेकिन वँहा चढ़ावा चढ़ाने के बावजूद उसके मन को शांति न मिलती थी वह दर्शन करने के पश्चात भी बुझे मन से घर की ओर चल देता था यह उसका रोज का नियम बन चुका था अंजान अक्सर सोचा करता था कि वह रोज ईश्वर के दर्शन करता है प्रसाद चढ़ाता है किंतु उसके मन को संतोष क्यों नही मिलता..........

रोज की तरह ही आज भी अंजान मंदिर पहुँचा और प्रसाद खरीदने के लिए एक दुकान पर पँहुचा तो पीछे से एक 6 -7 साल की बच्ची ने आवाज दी भैया भैया भूख लगी है कुछ खिला दो ना तो दुकानदार ने कहा साहब इनकी आदत खराब है कुछ मत देना तो अंजान ने भी छोटी सी लड़की को जोर से फंटकार दिया चल हट पीछे भाग यँहा से आवाज मे कुछ ज्यादा ही रोष था बच्ची डाँट सुनकर सहम गई और उसकी छोटी छोटी पलके अश्रुों से भीग गई और वह बच्ची वँहा से चली गई अंजान ने प्रसाद लिया और दर्शन के लिए लाइन मे लग गया लेकिन आज नंबर आने मे कम से कम एक घंटा लगा जब अंदर पहुँचे तो पता चला कि कोई विआईपी दर्शन के लिए आया हुआ है तो आज प्रसाद की थाली एक तरफ खाली कर बिना भोग लगाए भक्तों को जल्दी जल्दी आगे बढ़ाया जा रहा था अंजान ने मन ही मन कहा बताओ भगवान के घर मे भी भेदभाव वह बुझे मन से घर की तरफ चल दिया............

अगले दिन जब वह मंदिर पहुँचा तो वही बच्ची मंदिर के बाहर बैठी हुई नजर आई उसकी नजर जब बच्ची पर पढ़ी
तो बच्ची के चेहरे पर उदासी साफ नजर आ रही थी बच्ची ने अंजान को देखकर नजरे ऐसे झुका ली जैसे उसने कोई बहुत बढ़ा गुनाह किया हो अंजान मंदिर मे दर्शन कर वापस घर चल दिया अब वह बच्ची उसको रोज नजर आने लगी वह उसकी ओर देखता उसकी उदासी देख उसके चेहरे पर भी अब मायूसी के भाव आने शुरु हो चुके थे और वह पहले से ज्यादा खिन्न रहने लगा एक दिन जब वह मंदिर पहुँचा तो वह बच्ची उसको कही नजर नही आई वह अपनी नजरो से उसको इधर उधर ढुढंता रहा लेकिन वह कहीं नजर नही आई वह और ज्यादा उदास हो गया और आज बिना दर्शन करे ही वापस चला गया लगभग हफ्ते भर यही सिलसिला चलता रहा............

सोमवार का दिन था आज बोझिल कदमो से अंजान मंदिर की ओर बढ़ते हुए सोच रहा था कि उसने ऐसा क्या कर दिया है कि वह उदास है किसी काम मे मन नही लगता और क्यों मंदिर के बाहर से ही उसके कदम वापिस मुड़ जाते है जैसे ही वह इन बातों के बारे मे सोचता है उसकी आँखों के सामने उस छोटी सी बच्ची का भूखा प्यासा उदास चेहरा घूम जाता है और अंजान को महसूस होता है कि उसने एक छोटी सी मासूम बच्ची के साथ कितना गलत व्यवहार किया यह सब सोचते सोचते वह मंदिर पहुँचता है तो आज वह बच्ची उसे मंदिर के बाहर बैठी दिख जाती है अंजान सीधा बच्ची के पास पहुँचता है और उसकी ओर ध्यान से देखता है बच्ची उसको देखकर सहम जाती है और वह अपनी नजरें नीची कर लेती है वह बच्ची के सर पर प्यार से हाथ फेरकर कहता है बिटिया डरो मत मै तुमसे माफी मांगता हूँ और बच्ची उसकी तरफ देखती है और बढ़ी बेबसी से कहती है भैया भूख लगी है कुछ खिला दो ना उसकी आवाज मे लाचारी साफ झलक रही थी यह सुनकर अंजान भावुक हो जाता है और उसकी आँखों मे नमी आ जाती है वह बच्ची को भर पेट भोजन कराता है भोजन करने केे बाद बच्ची के चेहरे पर एक बेहद ही खूबसूरत मुस्कान आ गई थी और वह अंजान से कहती है धन्यवाद भइया काफी दिनो से भर पेट भोजन नही किया था यह सुनकर वह बच्ची के सर पर करुणा से हाथ फेरकर कहता है बेटा तुम्हारे माता पिता कँहा है बच्ची बोलती है माँ बाबा अब नही रहे तो अंजान कहता है फिर तुम रहती कँहा हो तो बच्ची कहना शुरु करती है कि माँ कहती थी कि ईश्वर ही हम सब के माँ बाबा है इसलिए मेरे माँ बाबा नही रहे तो मै यँहा मंदिर के बाहर रहने लगी हूँ अंजान ने कहा तुम कभी मंदिर मे अंदर गई हो बच्ची ने कहा नही हमे अंदर नही जाने दिया जाता वो लोग कहते है मंदिर मे दर्शन करने के लिए पैसा और प्रसाद चढ़ाना पड़ता है मेरे पास तो है ही नही इस पर अंजान बोलता है तुम लोगों को प्रसाद मिलता है बच्ची कहती है कभी कभी फिर दोनो चुप हो जाते हैं अंजान कुछ सोच रहा होता है तभी बच्ची कहती है भैया भूख लगती है इसलिए तो आप से खाना माँग रही थी लेकिन आपने मना करने की जगह डाँट दिया मै डर गई थी फिर किसी से माँगने की हिम्मत ही नही हुई और पिछले कुछ दिनो से मंदिर वालों ना यँहा से भी हटा दिया था यह कहकर बच्ची उदास हो गई जबकि अंजान की आँखों से अब लगातार आँसू बहने लगे और उसने बच्ची को जोर से गले लगा लिया आज उसे बेहद ही संतोष महसूस हो रहा था क्योंकि अब अंजान को ईश्वर और धर्म का असल अर्थ समझ आ चुका था उसे उस अंजान बच्ची से एक अंजाना रिश्ता महसूस हो रहा था बिल्कुल वैसे ही जैसे हम सब जानते है कि इश्वर हर चीज मे विराजमान है लेकिन फिर भी अंजान बने रहते है............

#निखिल_कुमार_अंजान......

#ईश्वर.....
#निखिल_कुमार_अंजान....
#Nojoto
#मेरी_डायरी

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एक हकीकत
एक मासूम , प्यारी सी बच्ची 
हंसती खेलती अपने घर से बाहर निकली
घर के गेट से निकलते ही जाने क्यों सहमी
एक नन्ही हाथों मे कुछ दस के नोट थी पकड़ी
और मन ही मन ये सोच रही,
मां ने कहा था चुपचाप जाना 
किसी से राह मे ना बतियाना 
कोई कुछ दे तो ना खाना 
जल्दी सामान ले वापस आना
तुम ज्यादा देर ना लगाना 
फिर मुस्कुराई , और मन मे बोली
जाने क्यों मां इतना डरती है
कौन से राक्षस की बात करती हैं
घर के पास ही तो दुकान है
सबसे  तो पापा की पहचान  हैं
फिर पलट के पिछे देखा
जैसे नन्ही आंखें मां को ढूंढ रही
एक मासूम प्यारी सी बच्ची
मां शायद कुछ काम मे लगी होगी 
मेरा रास्ता देखती होगी
ये कैसा डर उस मासूम को सता रहा
हिम्मत करके आगे बढ़ती
बस चार घरों के बाद ही दुकान है
यही वह खुद को समझा रही
एक मासूम प्यारी सी बच्ची
मुस्कान

एक हकीकत .....ये तो उस मासूम बच्ची की उलझन है आगे पढ़िये उस मां की उलझन एक हकीकत पार्ट 2।
#nojotohindi #Nojotosacchai

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