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Priya's poetry life

यहां भी एक था राजा एक थी रानी 
पर ये कहानी ना थी दूसरो की तरह सुहानी
मिले तो थे, वो इस तरह जैसे हो कोई प्रेम कहानी
पर परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी जिसने बदल दी,
 पूरी ही कहानी 
उलझ गए रिश्ते कुछ इस कदर, की रिश्तों में रह गई थी
 बस खिचतानी
जाने रिश्तों में कैसी ये कड़वाहट थी आई, 
अब राजा रानी के रिश्तों में कैसी थी ये दूरी लाई
टकरारो में गुजरते थे अक्सर दिन और राते
अब कहा हो पाती थी वो प्यार भरी बाते
अगर कोई उनको समझाने भी थे आते,
वो अक्सर उनसे ही थे उलझ जाते
बस यूंही उलझ कर रह गई उनकी प्रेम कहानी 
एक था राजा एक थी रानी

©Priya's poetry life
  #WalkingInWoods #Life #Life_experience #Poetry #Quotes #story #Nojoto #nojotohindi #Stories #poem
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priya300717

उसकी सलाह मान भी ली...
 अपनी मन मानी कर लेने दी....

 नहीं बचा जिस्म में उसके कुछ...
 इस लिए जचकी में ही अपना दम तोड़ दी थी.... 

 एक नन्ही सी जान को...
 जल्लादों के हाथों में सौंप दी थी.... 

 बैठ कर सब लाश पे उसकी अफ़सोस मना कर रोने लगे....
 पास खड़ी रूह उसकी काँप कर देखने लगी....

 तड़प कर बोली रूह उस मासूम की...
 बस करो माई बाप मेरे , बस भी करो पतिदेव जी....

 सांसो का चलना देख कर ज़िंदा लाश तो बना दी थी...
 अब धड़कनो के रुकने पर कौन-सा शोक मनाओगे... 

 ऐ मेरी ज़िंदगी को तमासा बनाने वाले...
 मेरी मौत का तमासा ना कर,रहने दो...

 मेरे बच्चे का क्या कसूर भगवान्...
 उससे दूर ही रखो इन सब की परछाई से भी.... 

 कहते है बारिश रूठ के बरसी...
 भगवान् भी जाग उठा उस वख्त...
जब बात पहूंची उसके मौत की 
उसकी मोहोब्बत तक....

 आ कर उसके प्रेमी ने शान से जनाजा उठाया था....
 दहकते अंगार देख उसकी आँखों में सामने कोई ना आ पाया था....

 एक ही लब्ज़ में कह गया वो इतना ही...
 टुकड़ा सौपा था ज़िगर का मैंने.... 
 तुम लोगो ने पत्थर समझा कैसे...

 ज़िंदा मेरी जान को....
तुमने सामान समझा कैसे...।।

©priya300717
  #WalkingInWoods
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BROKENBOY

मेरे जिस्म से मेरी रूह निकाल दी उसने
मुझे उदास रहने की आदत डाल दी उसने

किसी ने उससे पूछा कि चाहत क्या है
पहले तो बहुत रोया फिर मेरी मिसाल दी उसने

©BROKENBOY #WalkingInWoods 
मेरे जिस्म से मेरी रूह निकाल दी उसने
मुझे उदास रहने की आदत डाल दी उसने

किसी ने उससे पूछा कि चाहत क्या है
पहले तो बहुत रोया फिर मेरी मिसाल दी उसने

#WalkingInWoods मेरे जिस्म से मेरी रूह निकाल दी उसने मुझे उदास रहने की आदत डाल दी उसने किसी ने उससे पूछा कि चाहत क्या है पहले तो बहुत रोया फिर मेरी मिसाल दी उसने #Shayari

14 Love

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कृतान्त अनन्त नीरज...

यदि कोई 
आपको "हल्के" में लेता है
तो आप उसे serious लेकर
क्यों "बोझ" लेते हो...?

©कृतान्त अनन्त नीरज...
  #WalkingInWoods #love#nojoto#life#beingoriginal
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Richa Dhar

(समर्पण)✍️✍️✍️


मैं नहीं चाहती थी संसारी होकर जीना 
मैं नहीं चाहती थी किसी पे भी मरना 
मेरा आत्मसुख मेरा समर्पण कहीं और होना था 
मुझे संसार में लिप्त नहीं होना था 
मुझे चाहिए था ईश्वर तत्व का उजाला 
मगर इस जगत का नियम था निराला 
मन आज भी विचरण कर रहा है 
अध्यात्म की ओर जा रहा है 
मगर मैं ये कैसे जाल में फंस गई 
मेरे जीवन की नांव न जाने किस भंवर में फस गयी 
मुझसे क्यों नहीं हो पाया जीवन में ये अर्पण 
आत्मसमर्पण कर क्यों नहीं कर में खुद का (समर्पण)...

©Richa Dhar #WalkingInWoods समर्पण

16 Love

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Richa Dhar


समर्पण✍️✍️✍️


मैं नहीं चाहती थी संसारी होकर जीना 
मैं नहीं चाहती थी किसी पे भी मरना 
मेरा आत्मसुख मेरा समर्पण कहीं और होना था 
मुझे संसार में लिप्त नहीं होना था 
मुझे चाहिए था ईश्वर तत्व का उजाला 
मगर इस जगत का नियम था निराला 
मन आज भी विचरण कर रहा है 
अध्यात्म की ओर जा रहा है 
मगर मैं ये कैसे जाल में फंस गई 
मेरे जीवन की नांव न जाने किस भंवर में फस गयी 
मुझसे क्यों नहीं हो पाया जीवन में ये अर्पण 
आत्मसमर्पण कर क्यों नहीं कर में खुद का {समर्पण}...




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©Richa Dhar
  #WalkingInWoods समर्पण

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Richa Dhar

💐गम और खुशी💐

इसमें इतना गमगीं होने की क्या बात है
गम और खुशी तो दुनिया भर के साथ है

रोज किसके साथ रहता है उजाला 
चल नहीं पाता अधिक अतीत काला

चन्द सांसे माटी को मिली यही क्या कम मिला
यह तो है अवसर की बात किसी को खुशी तो किसी को गम मिला

तुम तो हो इन्सान जो कह लेते हो दुःख दर्द को 
चांद कहाँ तक रोए जिसके आगे पीछे रात है

सूरज रोता अगर कि जैसी मिली बेचारे को जलन 
कब का डूब गया होता अब तक तारों वाला गगन

लेकिन साहस तो देखो उस चलती फिरती आग का
जहां पांव रख देता पांव मुस्कुराता वहीं प्रभात है,

तुम शायद विश्वास करोगे नहीं कि इस संसार में
छुई मुई के पातों तक पर पतझर का आघात है

फिर कैसी ये व्यर्थ की निराशा और कैसा ये विषाद है 
चाहिये थोड़ा परिवर्तन फिर देखो जीवन में कितना अनुराग है।

©Richa Dhar #WalkingInWoods गम और खुशी

#WalkingInWoods गम और खुशी #कविता

16 Love

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Shahnawaz Atique

तुम जो कहते हो यार..! फक़त ऐसा नहीं था 
उजड़ी हो जिसमे ज़िंदगी, वो सिर्फ हादसा नहीं था
यादों के मलबे में दबी हैं माज़ी की चिंखे
किश्ती की खुशफहमी, दरिया को दोस्ती नहीं था
तुम जो कहते हो यार..! फक़त ऐसा नहीं था

ग़म था उसे मज़ीद और इज़ाफा कर आया हूं 
मोड़ था वीरान और उसे तन्हा छोड़ आया हूं 
पहेली ज़िंदगी की क्या सुलझा पाएगी लड़की 
नादान है वो और मैं पेचीदा कर आया हूं

शाहनावज उस टूटी किश्ती का भी किनारा होता 
अगर तुम्हें उससे माज़रत ना गवारा होता..

©Shahnawaz Atique #WalkingInWoods #shahnawazatique #Shayari #viran #gam #Broken #Shayar #mohabbat #Love #nojato
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Kamlesh Kandpal

घने वृक्षों की अदभुत छांव
देख उड़ने से लगते हैं पाँव।
मधुर बहती है जब जब बयार
पत्तों से पत्तों की होती तकरार।
छन कर आती किरणे सूरज की
खुशबू भी भाये वनभूमि के रज की। 
झींगुरों का, टिड्डों का मधुर गुंजन
हरितिमा जंगल में डूब जाये रे मन।

©Kamlesh Kandpal
  #WalkingInWoods
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Thakur Rajan Singh





सूरज चंदा इस दुनिया में 
उगते उगते ढल जाते हैं
जाने कितने दरिया यूं ही 
अपना रंग बदल जाते है

कितने किनारे नदियों के  
जाने कितनी सदियों से
दूर दूर दिन रात रहे हैं
कुछ मीलों के रस्ते थे सब
फ़िर कहां मुसाफ़िर साथ रहे है

हमने पाली एक चिरैया
जिसने सारे भरम बुने है
अपने दिल को छलने वाले
दिल ने सारे करम बुने है

बिखरे सारे ख़्वाब वही हैं
ठहरे सब जवाब वही है
अपने ऐसे भी हालात रहे है
कुछ मीलों के रस्ते थे सब
फ़िर कहां मुसाफ़िर साथ रहे है



.....

©Thakur Rajan Singh
  #WalkingInWoods
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