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Parasram Arora

पर्यायवाची...... #शायरी

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खून को पानी का पर्यायवाची  मत मान. लेना
अनुभन कितना भी कटु क्यों न हो वो.कभी कहानी नही बन सकताहै 

उस बसती मे  सच  बोलने का रिवाज  नही है
यहां कोई भी  आदमी  सच.को  झूठ बना कर पेश कर सकता है

ताउम्र अपना  वक़्त   दुसरो की भलाई मे  खर्च करता रहा वो
ऐसा आदमी कुछ पल का वक़्त भी अपने लिये निकाल नही   सकता है

©Parasram Arora पर्यायवाची......

Jogendra Singh writer

nojoto ka पर्यायवाची #Light

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आपके अनुसार Nojoto का पर्यायवाची  क्या है
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©Jogendra Singh Rathore 6578 nojoto ka पर्यायवाची

#Light

Parasram Arora

सृजन

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हाँ  मैं ही  हूँ
वो तथाकथित  ईश्वर
जिसने  इस   बदरंग  दुनिया का 
निर्माण किया है
पर  तुम ये बात   भूल से भी किसीको
कह  मत  देना  कि ये दुनिया  मैंने  बनाई है
अन्यथा  लोग  देरी किये बिना
बिना  समझें  ही  मेरा  कत्ल कर देंगे
वो भी इसलिए कि  आखिर  मैंने क्यों 
इतनी  विकृत  और  विषैली  दुनिया  का  सृजन
कर दिया  है

©Parasram Arora सृजन

Kamlesh Kandpal

"सृजन "

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मैं टूटते तारों के बारे में क्यों लिखूं? 
 मैं बाढ़ में समा गये  खेतों बारे में क्यों लिखूँ 
 
मुझे अच्छा लगता है, लिखना, पल्लवित होते  पुष्प के बारे में
 मुझे अच्छा लगता है लिखना, उगते सूरज के बारे में
 मैं डरता हूं उदासी से, तन्हाई से 
मै डरता हूँ अँधेरे से, बेहयाई से 
 मुझे सृजन के गीत सुन लेने दो जरा, 
मुझे जीवन के राग गुन लेने दो जरा "सृजन "

Arora PR

सृजन #कविता

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himani panchal

#सृजन

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गर तुझे ज़िद है,
मुझे मिटाने की।
तो याद रख ,
मै भी सृजन का बीज हूँ ।
मुझ में जीजिविषा है,
फिर से उग जाने की ।। #सृजन

संजय श्रीवास्तव

सृजन

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तुमको तो पा लिया मैने 
बस उसी एक पल में
जिसमें शामिल थी 
तुम्हारी मौन स्वीकृति
अनंत आकाश सा मन 
सप्तअश्वो से बंधे रथ में
भागता हुआ अकेला 
अनजान पथ पर जिसमें
थी तुम्हारी मधुर स्मृति
हर पल तेरे अहसास की खुशबू
अंतर्मन में समेट कर 
मैं अचेतन मूक सांकल की तरफ 
नजरें गड़ाये 
तमाम दिवास्वप्न के यथार्थ मे उतरने के
अद्भुत क्षण की.प्रतीक्षा में 
व्यग्र आतुर मन
कंंपकंपाते हाथ की
दस्तक ने
आखिर भंग कर दी
छायी हुई नीरवता
एक क्षण भी व्यर्थ 
किये बिना
खुल गया सांकल
और फिर
सृष्टि की अनुपम कृति
मेरे समक्ष 
अकथनीय अकल्पित निःशब्द
अनिद्य सौंदर्य
को दृष्टिपात करता 
व्याकुल नयन
शायद इन्ही अनमोल 
क्षणों में हुआ
एक खामोश कविता का हुआ
सृजन सृजन

Dharmendra singh

सृजन

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सृजन ही सृष्टि का सौंदर्य है।

©Dharmendra singh सृजन

Arun tripathi

##सृजन

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Meenakshi Sharma

सृजन #शायरी

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शायरी
सुप्रभात

ये धरती इक बगिया है
भगवान इस बगिया के 
      माली है।
और हम सब इस बगिया के फूल है
टूटेगा जब इक फूल तो फिर भगवान
इक नया फूल उगा देना।
और इस धरती रुपी बगिये की शोभा को बढ़ा देना और सृष्टि का नया अध्याय
आरंभ करा देना।

Meenakshi Sharma सृजन
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