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Best rekhta Shayari, Status, Quotes, Stories

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"मुझे यकीं था कि गुनाह हर बार करेगा..! इन शोखियों से क़त्ल बार-बार करेगा..!! उम्मीद-ए-फ़र्दा थी इब्तिदा-ए-इश्क़ में..! मेरी छोटी-छोटी हरकतों पर रार करेगा..!! मुझे बद्दुआ भी लगी तो इश्क़ की लगी..! अब क्या कोई सीने खंज़र पार करेगा..!! उसका हर निशाना इतने करीब गुज़रता..! मिरे रफू जख्मों को तार - तार करेगा..!! मिरा पत्थर-ए-दिल साफ़ नज़ऱ आता है..! यक़ीनन तीर-ए-नाज़ आर-पार करेगा..!! मुझे खुद से अज़ीज़ बीमार-ए-इश्क़ है..! अब तो खुदा ही मेरी नईया पार करेगा..!! उस रहनुमाई से क्या शिकायत करूं..! दिल-ए-उम्मीद न थी ऐसा वार करेगा..!! उसकी रुखसती में चार कंधे है "राज"..! तिरी आंखों में बारिश ज़ार-ज़ार करेगा..!! ©Darshan Raj"

मुझे यकीं  था कि गुनाह हर बार करेगा..!
इन शोखियों से क़त्ल  बार-बार करेगा..!!

उम्मीद-ए-फ़र्दा थी इब्तिदा-ए-इश्क़ में..!
मेरी छोटी-छोटी हरकतों पर रार करेगा..!!

मुझे बद्दुआ भी लगी तो इश्क़ की लगी..!
अब क्या कोई सीने  खंज़र पार करेगा..!!

उसका हर निशाना इतने करीब गुज़रता..!
मिरे  रफू जख्मों को  तार - तार करेगा..!!

मिरा पत्थर-ए-दिल साफ़ नज़ऱ आता है..!
यक़ीनन  तीर-ए-नाज़ आर-पार करेगा..!!

मुझे खुद  से अज़ीज़ बीमार-ए-इश्क़ है..!
अब तो खुदा ही मेरी नईया पार करेगा..!!

उस  रहनुमाई से  क्या  शिकायत करूं..!
दिल-ए-उम्मीद न थी ऐसा वार करेगा..!!

उसकी  रुखसती में चार  कंधे है "राज"..!
तिरी आंखों में बारिश ज़ार-ज़ार करेगा..!!

©Darshan Raj

#a
उम्मीद-ए-फ़र्दा = आने वाले कल की आस
तीर-ए-नाज़ =पलकों का तीर
इब्तिदा-ए-इश्क़=पहला प्यार

#5LinePoetry
#Nojoto #rekhta #gazal #ग़ज़ल #gajal #नज़्म #darshan #urdu

22 Love

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"उस के शहर में अब नुमाइश न रही..! मिलने की कोई अब गुंजाइश न रही..!! फीके पड़ने लगे है आसमां के परदे..! जी भर देखने की ख़्वाहिश न रही..!! वहम था कि दुआओं में वफ़ा मिलेगी..! खुदा तुझसे कोई फरमाइश न रही..!! बिछड़ने के डर से फासले करता रहा..! खाई गहरी इतनी की पैमाइश न रही..!! मेरे दुश्मन भी हमदर्दी जताने लगे..! देख कर हश्र मेरा साज़िश न रही..!! हम शनावर कहां इतने कमाल के थे..! छोड़कर हाथ मेरा नवाज़िश ना रही..!! मशहूर किया कुछ इस तरह से "राज..! भरी महफिल में भी सताइश न रही..!! ©Darshan Raj"

उस के  शहर  में अब  नुमाइश न रही..!
मिलने की कोई अब गुंजाइश न रही..!!

फीके  पड़ने  लगे है  आसमां के परदे..!
जी भर  देखने  की  ख़्वाहिश न रही..!!

वहम था कि दुआओं में वफ़ा मिलेगी..!
खुदा  तुझसे कोई  फरमाइश  न रही..!!

बिछड़ने  के डर से  फासले करता रहा..!
खाई गहरी इतनी की पैमाइश न रही..!!

मेरे  दुश्मन भी  हमदर्दी  जताने लगे..!
देख  कर  हश्र मेरा  साज़िश  न रही..!!

हम  शनावर कहां इतने कमाल के थे..!
छोड़कर हाथ मेरा  नवाज़िश ना रही..!! 

मशहूर किया कुछ इस तरह से  "राज..!
भरी महफिल में  भी सताइश न रही..!!

©Darshan Raj

#a
#5LinePoetry
#rekhta #darshan #गजल #gazal #ग़ज़ल #nazm #Nojoto #urdu
@Priya dubey @Govind Pandram @I.A.S dreamerneha 🌟 @Reena Sharma "मंजुलाहृदय" @Anjli Rathi Shilpa yadav

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"हाथों की लकीरें यकीनन मिटने लगी..! लहू - ए - तहरीरें दफ़तन जलने लगी..!! मिरे ख्वाहिश के आईने पर धूल क्या जमी..! कागजों पर लहू की बूंदें भी सूखने लगी..!! जो चला हर दफा मेरे साथ साय की तरह..! इक दौर-ए-मोहब्बत की उम्र घटने लगी..!! बहुत गुमान था इन हाथों की लकीरों पर..! झोली फकीरों की है लकीरें कहने लगी..!! मेरी दहलीज पर रेखाएं सख्त खींची गई..! जबसे हिज़्र नफ़स बनकर साथ रहने लगी..!! दरख़्त से टूटकर महज़ पत्ता हाथ ना लगा..! बाज़ार-ए-जिस्म की आंधियाँ चलने लगी..!! खुद की तस्वीर का अक़्स नजर न आता..! चेहरा-ए-गमज़दा पर लकीरें उभरने लगी..!! ©Darshan Raj"

हाथों  की  लकीरें  यकीनन  मिटने लगी..!
लहू - ए - तहरीरें  दफ़तन  जलने  लगी..!!

मिरे ख्वाहिश के आईने पर धूल क्या जमी..!
कागजों पर लहू की बूंदें भी सूखने लगी..!!

जो चला हर दफा मेरे साथ साय की तरह..!
इक  दौर-ए-मोहब्बत की उम्र घटने लगी..!!

बहुत गुमान था इन हाथों की लकीरों पर..!
झोली फकीरों की है लकीरें कहने  लगी..!!

मेरी दहलीज पर रेखाएं  सख्त खींची गई..!
जबसे हिज़्र नफ़स बनकर साथ रहने लगी..!!

दरख़्त से  टूटकर महज़ पत्ता हाथ ना लगा..!
बाज़ार-ए-जिस्म की आंधियाँ चलने लगी..!!

खुद की तस्वीर  का अक़्स  नजर न आता..!
चेहरा-ए-गमज़दा पर लकीरें उभरने लगी..!!

©Darshan Raj

#a
#Curfew2021
#rekhta #gazal #ग़ज़ल #darshan #Nojoto #nazm #achanak #Instagram

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"माँ तेरा ही प्रेम पवित्र है, और गंगा का पानी..! बाकी तो सब नश्वर है, बस तेरी अमर कहानी..! हर युग - युग नें पहचानी, माँ तेरी प्रेम निशानी..! थोड़ी चंचल थोड़ी सयानी, थोड़ी सी माँ नादानी..! हर घर - घर में नई कहानी, हर घर में खींचातानी..! चलो आओ तुम्हें सुनाता हूं, माँ की अमर कहानी..! द्वापर युग की बात है, श्री कृष्ण की गाथा पुरानी..! जन्म दियो माँ देवकी, पूत बुलावत यशोदा रानी..! ह्रदय पत्थर धर लियो, जननी कुन्ती महारानी..! लोक - लाज़ में त्याग दियो, सूर्य पुत्र वरदानी..! युग - युग में ऐसा वीर नहीं, कर्ण जैसा महादानी..! जन - जन ने नाम रख दियो, राधे पुत्र कर्ण ज्ञानी..! माँ की महिमा अपार है, हर जन को बात बतानी..! सेवा भाव समर्पण रखो, ना बनो वीर अभिमानी..! ब्रह्मा विष्णु महेश भी पूजे, पूजे पंचतत्व हर ज्ञानी..! माँ की ममता का मोल नहीं, जग को बात समझनी..! ©Darshan Raj"

माँ  तेरा  ही प्रेम  पवित्र है, और  गंगा  का  पानी..!
बाकी  तो सब  नश्वर है, बस  तेरी अमर  कहानी..!

हर युग - युग  नें पहचानी, माँ  तेरी प्रेम  निशानी..!
थोड़ी चंचल थोड़ी  सयानी, थोड़ी सी माँ नादानी..!

हर घर - घर में  नई कहानी, हर घर में खींचातानी..!
चलो आओ तुम्हें सुनाता हूं, माँ की  अमर कहानी..!

द्वापर युग की बात है, श्री कृष्ण की  गाथा पुरानी..!
जन्म दियो  माँ देवकी, पूत बुलावत  यशोदा रानी..!

ह्रदय  पत्थर  धर  लियो, जननी  कुन्ती महारानी..!
लोक - लाज़  में  त्याग  दियो, सूर्य  पुत्र  वरदानी..!

युग - युग में ऐसा वीर नहीं, कर्ण  जैसा महादानी..!
जन - जन ने नाम रख दियो, राधे पुत्र कर्ण ज्ञानी..!

माँ की  महिमा  अपार है, हर जन को बात बतानी..!
सेवा भाव  समर्पण रखो, ना बनो  वीर अभिमानी..!

ब्रह्मा विष्णु महेश भी पूजे, पूजे  पंचतत्व हर ज्ञानी..!
माँ की ममता का मोल नहीं, जग को बात समझनी..!

©Darshan Raj

#a
#MothersDay2021
#pyaarimaa #maa #माँ #HappyMothersDay #Nojoto #nojotonews #rekhta #darshan
@haquikat @indu singh @Antima Jain @Amita Tiwari @Manak desai @Govind Pandram

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"जा चुके थे जाने क्यों फिर से लौटें है वो, मुझसे मेरा ही अफ़साना मुझसे बोलें है वो। बेमिसाल थी खामोशी जो वो रखते थे कभी, जाने क्यों आज कल इतनी जुबां खोलें है वो। उनको होती शिकायत थी मेरे मशरूफ़ रहने से, जाने क्यों आज कल मुझमे इस कदर खोएं है वो। आंखें देखी ना मैंने बस उनकी आवाज ही सुनी, रोते थे तुम जैसे मिज़ाज़ शायद अब रोएं है वो । ©shubham tiwari"

जा चुके थे जाने क्यों फिर से लौटें है वो,
मुझसे मेरा ही अफ़साना मुझसे बोलें है वो।

बेमिसाल थी खामोशी जो वो रखते थे कभी,
जाने क्यों आज कल इतनी जुबां खोलें है वो।

उनको होती शिकायत थी मेरे मशरूफ़ रहने से,
जाने क्यों आज कल मुझमे इस कदर खोएं है वो।

आंखें देखी ना मैंने बस उनकी आवाज ही सुनी,
रोते थे तुम जैसे मिज़ाज़ शायद अब रोएं है वो ।

©shubham tiwari

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